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पूर्वी भारत के महत्वपूर्ण बंदरगाह ताजपुर का विकास राज्य सरकार तय करेगी: सर्वानंद सोनोवाल

मंत्री ने आगे बताया कि हाल ही में राज्य सरकार ने ताजपुर बंदरगाह के विकास के लिए पुनः नई निविदा आमंत्रित की है।

By मणिपुष्पक सेनगुप्ता, Posted by : राखी मल्लिक

Feb 11, 2026 13:06 IST

नई दिल्ली : पूर्व मेदिनीपुर के ताजपुर में गहरे समुद्री बंदरगाह परियोजना का कार्य बंद होने को लेकर भाजपा नेताओं द्वारा बार-बार प्रश्न उठाए गए हैं। भाजपा सांसद शमीक भट्टाचार्य ने राज्यसभा में इस विषय को उठाया। उन्होंने लिखित प्रश्न के माध्यम से ताजपुर बंदरगाह के भविष्य के संबंध में जानकारी मांगी। शमीक ने पूछा कि क्या आवश्यक सरकारी अनुमतियां न मिलने तथा राज्य सरकार के सहयोग के अभाव में अदाणी समूह इस परियोजना से पीछे हट गया है।

इसके उत्तर में बंदरगाह, जहाजरानी और जलमार्ग परिवहन मंत्री सर्वानंद सोनोवाल ने मंगलवार को बताया कि प्रमुख बंदरगाहों को छोड़कर अन्य बंदरगाहों का प्रशासनिक नियंत्रण संबंधित राज्य सरकारों के अधीन होता है। ताजपुर बंदरगाह भी उसी श्रेणी में आता है। उन्होंने कहा कि वर्ष 2022 में पश्चिम बंगाल सरकार ने ताजपुर में प्रस्तावित ग्रीनफील्ड बंदरगाह के विकास हेतु निविदा आमंत्रित की थी। उस प्रक्रिया में अदाणी पोर्ट्स एंड स्पेशल इकोनॉमिक जोन लिमिटेड का चयन किया गया तथा उन्हें लेटर ऑफ इंटेंट टू अवॉर्ड प्रदान किया गया। किंतु यह अंतिम समझौते में परिवर्तित नहीं हो सका।

मंत्री ने आगे बताया कि हाल ही में राज्य सरकार ने ताजपुर बंदरगाह के विकास के लिए पुनः नई निविदा जारी की है। नई निविदा की अधिसूचना 1 दिसंबर 2025 को जारी की गई है। केंद्र सरकार की ओर से स्पष्ट किया गया है कि ताजपुर बंदरगाह परियोजना के क्रियान्वयन की पूर्ण जिम्मेदारी राज्य सरकार की है। वर्तमान में राज्य सरकार ही नए निवेशक के चयन की प्रक्रिया संचालित कर रही है।

राज्यसभा के बाहर ताजपुर बंदरगाह के मुद्दे पर तृणमूल कांग्रेस की आलोचना करते हुए शमीक भट्टाचार्य ने कहा कि ताजपुर बंदरगाह बंगाल के कुशासन का ज्वलंत उदाहरण है। उन्होंने आरोप लगाया कि ममता बनर्जी सरकार वर्षों से भव्य बिजनेस समिट आयोजित कर लाखों रुपये व्यय करती रही है, जहां बड़े-बड़े वादे किए जाते हैं और राज्य की औद्योगिक तथा व्यापारिक स्थिति को बढ़ा-चढ़ाकर प्रस्तुत किया जाता है, जबकि वास्तविक स्थिति भिन्न है। उन्होंने खेद व्यक्त करते हुए कहा कि पूर्वी भारत की रणनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण समुद्री परियोजना, ताजपुर गहरे समुद्री बंदरगाह का कार्य लगभग ठप पड़ा है। उन्होंने यह भी कहा कि परियोजना की जिम्मेदारी अदाणी समूह को सौंपे जाने के बावजूद राज्य सरकार की लापरवाही के कारण कार्य प्रगति नहीं कर सका।

विपक्ष का आरोप है कि केंद्र की भाजपा सरकार अनैतिक रूप से अदाणी समूह को विभिन्न प्रकार की सुविधाएं प्रदान करती है। इस आरोप का खंडन करते हुए शमीक ने कहा कि विपक्ष शासित तेलंगाना और केरल में भी अदाणी समूह सफलतापूर्वक बंदरगाह तथा आधारभूत संरचना विकास का कार्य कर रहा है।

दूसरी ओर संसद में यह जानकारी दी गई है कि कोलकाता पोर्ट प्राधिकरण के बलागढ़ परियोजना की लागत 539.17 करोड़ रुपये निर्धारित की गई है। इस परियोजना से 2,600 प्रत्यक्ष तथा परोक्ष रोजगार सृजित होने की संभावना है। वर्ष 2028 तक इस परियोजना को पूर्ण करने की योजना बनाई गई है।

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