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भारतीय वायुसेना के सशक्तिकरण में ऐतिहासिक कदम: 3.25 लाख करोड़ में 114 राफेल लड़ाकू विमान का प्रस्ताव

भारतीय वायुसेना के लिए लड़ाकू विमान खरीदने के मामले में पहले कभी इतनी बड़ी राशि का सौदा नहीं हुआ।

By अयंतिका साहा, Posted by : राखी मल्लिक

Feb 13, 2026 13:04 IST

नई दिल्ली : आधिकारिक रूप से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली रक्षा मामलों की कैबिनेट समिति की अंतिम मंजूरी अभी बाकी है। अगले सप्ताह फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रॉं भारत यात्रा पर आएंगे।

यात्रा से ठीक पहले फ्रांस की कंपनी डसॉल्ट एविएशन से 3.25 लाख करोड़ रुपये में 114 राफेल लड़ाकू विमान खरीदने का प्रस्ताव रखा गया। गुरुवार को केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता वाली डिफेंस एक्विजिशन काउंसिल ने इस प्रस्ताव को स्वीकृति दे दी।

उल्लेखनीय है कि रक्षा सचिव के नेतृत्व वाले डिफेंस प्रोक्योरमेंट बोर्ड ने पिछले महीने ही इस समझौते को मंजूरी दे दी थी। इसके चलते फ्रांसीसी लड़ाकू विमानों का भारत आना अब केवल समय की बात माना जा रहा है। आंकड़े बताते हैं कि भारतीय वायुसेना के लिए लड़ाकू विमान खरीद के मामले में इतनी बड़ी राशि का समझौता पहले कभी नहीं हुआ।

समझौते की शर्तों के अनुसार भारत को 18 राफाल फ्लाई-अवे (युद्ध के लिए तैयार) स्थिति में मिलेंगे। बाकी 96 विमान भारत में ही डसॉल्ट के साथ संयुक्त उद्यम के तहत बनाए जाएंगे। इन विमानों के निर्माण में ‘मेक इन इंडिया’ पहल के तहत लगभग 60% कलपुर्जे देश में ही तैयार किए जाएंगे, ऐसा भी समझौते में उल्लेख है।

विशेषज्ञों का दावा है कि वायुसेना के लिए स्वीकृत 42 फाइटर स्क्वाड्रन में से वर्तमान में केवल 30 ही सक्रिय स्थिति में हैं। ऐसे में फ्रांसीसी विमान शामिल होने से देश की सुरक्षा में महत्वपूर्ण मजबूती आएगी। इस समझौते के तहत 114 विमानों को जोड़ने पर भारत के पास राफाल की संख्या 176 हो जाएगी, जिनमें से दो स्क्वाड्रन में 36 विमान पहले ही ऑपरेशनल हैं। इनमें नंबर 17 ‘गोल्डन एरोज’ स्क्वाड्रन अंबाला में तैनात है और नंबर 101 ‘फाल्कन’ स्क्वाड्रन हाशिमारा में स्थित है।

पिछले वर्ष ऑपरेशन ‘सिंदूर’ के दौरान उल्लेखनीय भूमिका निभाने वाले राफाल में मेटेओर बियॉन्ड विजुअल रेंज मिसाइल और स्कैल्प क्रूज़ मिसाइल मौजूद हैं, जिससे उपमहाद्वीप में संभावित युद्ध स्थिति में भारतीय वायुसेना की ताकत काफी बढ़ने की संभावना है। विशेषज्ञों का एक बड़ा वर्ग मानता है कि देश में फिफ्थ-जेनरेशन एडवांस्ड मीडियम कॉम्बैट एयरक्राफ्ट (AMCA) परियोजना अभी शोध चरण में है। साथ ही तेजस एमके-1ए 4.5 जेनरेशन फाइटर के निर्माण का कार्य भी अभी पूरी रफ्तार से शुरू नहीं हो पाया है। ऐसे में राफेल के शामिल होने से भारत को काफी राहत मिलेगी।

इसके अलावा DAC ने इस दिन भारतीय सेना के लिए वैभव एंटी-टैंक माइन और P-81 लॉन्ग रेंज MR एयरक्राफ्ट की खरीद को भी मंजूरी दी। जुलाई 2020 से अब तक फ्रांस से कई चरणों में 36 राफेल भारत आ चुके हैं।

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