कुआलालंपुर : व्यावसायिक समझदारी की वजह से करोड़पति बनने की कहानियां तो कई लोग सुनते हैं, लेकिन केवल अपने नाम के पहले अक्षर के प्रति लगाव किसी को दशकों में 634 करोड़ का मालिक बना सकता है, यह शायद किसी परीकथा को भी मात दे दे सकता है। साल 1993 की बात है। मलेशिया के लगभग दस साल के एक किशोर आरस्यान इस्माइल ने अपनी मां के क्रेडिट कार्ड से 100 डॉलर खर्च करके (जो उस समय लगभग 300 रुपये) ‘AI.com’ डोमेन खरीद लिया।
आज 2025 में वह मामूली निवेश सोने की खान में बदल चुका है। तकनीकी दुनिया की महायुद्ध में अब सबसे कीमती हथियार आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) बन चुका है। और इसी नाम का उपयोग कर क्रिप्टो डॉट कॉम के सीईओ क्रिस मार्जालेक को 70 मिलियन डॉलर यानी भारतीय मुद्रा में 634 करोड़ रुपये में डोमेन बेचकर आरस्यान ने इतिहास रच दिया।
इंटरनेट के शुरुआती दौर में जब मलेशिया में नेट-संसार का ज्यादा चलन नहीं था, तब आरस्यान ने यह डोमेन खरीदा था, न कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता की दूरदर्शिता के कारण, बल्कि सिर्फ इसलिए कि यह उनके नाम “Arsyan Ismail” के अक्षरों से मेल खाता था। लेकिन जैसे-जैसे समय बीता, इन दो अक्षरों का महत्व बढ़ता गया। डिजिटल रियल एस्टेट बाजार में “टू-लेटर” डोमेन दुर्लभ होते हैं, और खुद ‘AI’ नाम पर दुनिया के बड़े टेक जायंट्स की नजर थी। खबरों के अनुसार डोमेन बेचते समय उन्हें 100 मिलियन डॉलर तक का प्रस्ताव भी मिला।
लेकिन अत्यधिक लालच न दिखाते हुए उन्होंने 70 मिलियन डॉलर में डील करने को मंजूरी दे दी। आरस्यान की सादी सलाह रही, “बिलियनेयरों से ज्यादा सौदेबाजी नहीं करनी चाहिए।” पूरा लेनदेन क्रिप्टोकरेंसी के माध्यम से हुआ, जो इंटरनेट के इतिहास में अब तक की सबसे बड़ी सार्वजनिक डोमेन बिक्री के रूप में दर्ज हो गया।
2010 में CarInsurance.com के 49.7 मिलियन डॉलर में बिकने वाली रिकॉर्ड को उन्होंने आसानी से पिछे छोड़ दिया। जब सुपर बॉल के मेगा मंच पर क्रिप्टो डॉट कॉम ने अपने नए प्लेटफॉर्म की घोषणा की, तब दुनिया ने देखा कि इस असमान मुकाबले में आरस्यान ने असल में कितड़ी बड़ी बाजी जीत ली। 1993 में किए गए उस छोटे निवेश ने आरस्यान को दुनिया के डिजिटल रियल एस्टेट का मुकुटहीन सम्राट बना दिया।