मालेगांवः महाराष्ट्र के मालेगांव नगर निगम की उपमहापौर शान-ए-हिंद निहाल अहमद के कार्यालय में मैसूर के शासक टीपू सुल्तान की तस्वीर लगाए जाने के बाद विवाद खड़ा हो गया। शिवसेना और कुछ अन्य संगठनों ने इस पर आपत्ति जताई। मालेगांव नगर निगम के उपमहापौर शान-ए-हिंद निहाल अहमद ने विरोध को खारिज करते हुए कहा कि उनके कार्यालय में कौन-सी तस्वीर प्रदर्शित की जाएगी, यह तय करने का अधिकार उनका है।
उपमहापौर ने स्वयं को समाजवादी विचारधारा से प्रेरित बताते हुए कहा कि जिन ऐतिहासिक व्यक्तित्वों से वे प्रेरणा लेती हैं, उनकी तस्वीर लगाना गलत नहीं है। उन्होंने स्पष्ट किया कि टीपू सुल्तान की तस्वीर को केवल कार्यालय में मरम्मत कार्य के कारण अस्थायी रूप से हटाया गया है और कार्य पूरा होने के बाद उसे पुनः लगाया जाएगा।
हर्षवर्धन सापकल का बयान फिर सफाई
इसी विवाद के बीच महाराष्ट्र कांग्रेस अध्यक्ष हर्षवर्धन सापकल ने पत्रकारों से बातचीत में टीपू सुल्तान को लेकर बयान दिया। हर्षवर्धन ने कहा कि छत्रपति शिवाजी महाराज ने जिस ‘स्वराज्य’ की अवधारणा दी और जो अद्वितीय वीरता दिखाई, उसी परंपरा से प्रेरणा लेकर टीपू सुल्तान ने अंग्रेजों के विरुद्ध संघर्ष किया। हर्षवर्धन ने टीपू सुल्तान को बहादुर योद्धा बताते हुए कहा कि वीरता के प्रतीक के रूप में उन्हें शिवाजी महाराज के समकक्ष देखा जा सकता है। यही बयान राजनीतिक विवाद का मुख्य कारण बना।
विवाद बढ़ने के बाद हर्षवर्धन ने सफाई दी। हर्षवर्धन ने कहा कि उनके बयान को तोड़-मरोड़ कर पेश किया गया है और इसे राजनीतिक रंग दिया जा रहा है। उन्होंने दोहराया कि छत्रपति शिवाजी महाराज राष्ट्र का गौरव हैं और उनका उद्देश्य केवल यह बताना था कि टीपू सुल्तान ने स्वराज्य की प्रेरणा को आगे बढ़ाया। उन्होंने यह भी कहा कि पहले उन्होंने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की तुलना अफजल खान से अहंकार के संदर्भ में की थी, तब इतना विवाद नहीं हुआ था। वर्तमान विवाद को जानबूझकर बढ़ाया जा रहा है।
भारतीय जनता पार्टी का विरोध और मामला दर्ज
हर्षवर्धन सापकल के बयान पर भारतीय जनता पार्टी ने तीखी प्रतिक्रिया दी। पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता शहजाद पूनावाला ने कहा कि शिवाजी महाराज की तुलना टीपू सुल्तान से करना मराठा अस्मिता का अपमान है। पूनावाला ने कांग्रेस नेतृत्व से हर्षवर्धन को तत्काल हटाने और सार्वजनिक माफी की मांग की।
पुणे भाजपा अध्यक्ष धीरज घाटे की शिकायत पर पुणे के पर्वती पुलिस थाने में हर्षवर्धन सापकल के खिलाफ मामला दर्ज किया गया। शिकायत में आरोप लगाया गया कि इस बयान से धार्मिक भावनाएं आहत हुई हैं और सांप्रदायिक सौहार्द प्रभावित हो सकता है। पुलिस ने जांच प्रारंभ कर दी है।
महाराष्ट्र सरकार के मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले ने भी हर्षवर्धन की आलोचना करते हुए कहा कि इस प्रकार की टिप्पणी अस्वीकार्य है और यह छत्रपति शिवाजी महाराज का अपमान है।
राष्ट्रीय स्तर पर बहस
यह विवाद राष्ट्रीय राजनीति में भी गूंजा। असदुद्दीन ओवैसी ने एक सभा में कहा कि टीपू सुल्तान अंग्रेजों से लड़ते हुए शहीद हुए और उन्होंने ब्रिटिश शासन से दया याचना नहीं की। असदुद्दीन ओवैसी ने टीपू सुल्तान की विरासत का समर्थन किया। इसके जवाब में तेलंगाना भारतीय जनता पार्टी अध्यक्ष एन. रामचंद्र राव ने कहा कि टीपू सुल्तान का महिमामंडन इतिहास को विकृत करना है। उन्होंने आरोप लगाया कि टीपू के शासनकाल में दक्षिण भारत के कुछ क्षेत्रों में हिंदुओं पर अत्याचार हुए और देश ऐसे विकृत इतिहास को स्वीकार नहीं करेगा।