🔔 ताज़ा ख़बरें सबसे पहले!

Samachar EiSamay की ब्रेकिंग न्यूज़, राजनीति, खेल, मनोरंजन और बिज़नेस अपडेट अब सीधे आपके पास।

केरल हाईकोर्ट का बड़ा आदेश: इस्तीफा स्वीकार न करना बंधुआ श्रम के समान

इस्तीफा पत्र स्वीकार न कर एक कर्मचारी को शो‑कॉज़ नोटिस भेजा गया। उस नोटिस को चुनौती देते हुए वह अदालत का दरवाजा ताकने को मजबूर हुआ।

By कौशिक दत्त, Posted by : राखी मल्लिक

Feb 15, 2026 15:19 IST

तिरुवनंतपुरम : यदि कोई कर्मचारी पदत्याग देना चाहता है, तो उसे स्वीकार करना नियोक्ता का दायित्व है। रोजगार अनुबंध की शर्तों के अनुसार उस पदत्याग को स्वीकार करना होगा। और अगर ऐसा नहीं किया जाता है? तो उस अस्वीकृति को ‘बंधुआ श्रम’ माना जाएगा। ऐसा एक मामले में केरल हाईकोर्ट ने निर्णय दिया।

एक पब्लिक सेक्टर अंडरटेकिंग (PSU) कंपनी अपने कंपनी सेक्रेटरी का पदत्याग स्वीकार नहीं कर रही थी। इस पर कर्मचारी ने मामला दायर किया। इसी मामले में केरल हाईकोर्ट ने यह बात कही।

न्यायाधीश एन. नागरेश ने कहा कि अगर कोई कर्मचारी नोटिस पीरियड या अन्य शर्तों का पालन करता है, तो नियोक्ता गंभीर कदाचार या कंपनी के वित्तीय नुकसान के कारण सजा देने का मामला न हो, तो पदत्याग स्वीकार करने से इनकार नहीं कर सकते।

अदालत ने स्पष्ट किया कि किसी अन्य परिस्थिति में यदि नियोक्ता किसी कर्मचारी के पदत्याग को अस्वीकार करता है, तो यह भारत के संविधान की अनुच्छेद 23 के तहत निषिद्ध बंधुआ श्रम माना जाएगा।

जानकारी के अनुसार पदत्याग देने के बाद भी उस कंपनी ने अपने कंपनी सेक्रेटरी को काम पर आने का निर्देश दिया। उन्होंने ऐसा नहीं किया तो उन्हें शो-कॉज नोटिस भेजा गया और कारण बताया कि उनके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई क्यों नहीं की जाएगी। इस नोटिस को चुनौती देते हुए वह अदालत गए।

बताया गया कि PSU की वित्तीय स्थिति के कारण पदत्याग स्वीकार नहीं किया गया। लेकिन अदालत ने कहा कि वित्तीय समस्या कंपनी सेक्रेटरी या किसी अन्य को उनकी इच्छा के खिलाफ और बिना अनुमति के काम करने के लिए बाध्य नहीं कर सकती। यदि कर्मचारी के खिलाफ सजा देने की कोशिश की जाती है, तो इसे उनके पदत्याग करने के अधिकार का उल्लंघन माना जा सकता है।

याद रहे अक्टूबर 2022 से उन्हें वेतन दिया गया। 2020 में पिता के निधन के बाद उन्होंने नौकरी से इस्तीफा दिया था। बीमार मां को घर पर अकेला छोड़कर काम कर रहे थे। इस वजह से उनके पास अन्य कोई विकल्प नहीं था।

अदालत ने कहा कि यदि कंपनी से रिलीजलेटर नहीं दिया गया, तो उन्हें वैकल्पिक नौकरी नहीं मिल पाएगी। इसलिए अदालत ने उनका इस्तीफा स्वीकार करने और तुरंत राहत देने का आदेश दिया। साथ ही अदालत ने कहा कि मासिक वेतन और कानूनी लाभ भी उन्हें पूरी तरह दिए जाए।

Prev Article
दिल्ली पार्क में झूला झूलने से रोका सिरेब्रल पाल्सी से प्रभावित बच्ची को, परिवार की शिकायत
Next Article
काजीरंगा में गैंडे का हमला, वन रक्षक की मौत

Articles you may like: