उम्र बढ़ने के साथ पुरुषों में टेस्टोस्टेरोन का स्तर स्वाभाविक रूप से कुछ कम होता है लेकिन यदि यह असामान्य रूप से कम हो जाए तो शारीरिक और मानसिक समस्याएं पैदा हो सकती हैं। इस स्थिति को लो टेस्टोस्टेरोन या हाइपोगोनाडिज्म कहा जाता है। टेस्टोस्टेरोन पुरुषों का प्रमुख यौन हार्मोन है, जो मांसपेशियों की ताकत, हड्डियों की घनत्व, यौन इच्छा, शुक्राणु उत्पादन, मूड और ऊर्जा स्तर को नियंत्रित करता है।
कैसे पहचानें कि आप इस समस्या से जूझ रहे हैं?
* यौन इच्छा में कमी लो टेस्टोस्टेरोन का प्रमुख लक्षण है।
* इरेक्टाइल समस्या, यानी लिंग का पर्याप्त रूप से कठोर न होना।
* पर्याप्त नींद के बाद भी अत्यधिक थकान महसूस होना।
* मांसपेशियों की ताकत में कमी या व्यायाम का अपेक्षित परिणाम न मिलना।
* मूड स्विंग, चिड़चिड़ापन, उदासी या अवसाद की भावना।
* लंबे समय में हड्डियों की घनत्व कम होकर ऑस्टियोपोरोसिस का खतरा बढ़ सकता है।
* शरीर के बालों की वृद्धि पर असर पड़ सकता है।
क्या-क्या समस्याएं हो सकती हैं?
लंबे समय तक लो टेस्टोस्टेरोन रहने से केवल यौन जीवन ही नहीं, बल्कि संपूर्ण स्वास्थ्य प्रभावित हो सकता है।
* हृदय रोग का खतरा बढ़ सकता है।
* टाइप 2 डायबिटीज़ की आशंका बढ़ सकती है।
* वजन बढ़ना और मेटाबॉलिक सिंड्रोम का जोखिम।
* मानसिक स्वास्थ्य पर असर, जैसे चिंता, आत्मविश्वास में कमी और डिप्रेशन।
* प्रजनन क्षमता में कमी।
यह समस्या क्यों होती है?
उम्र बढ़ने के अलावा मोटापा, डायबिटीज़, लंबे समय का तनाव, नींद की कमी, अधिक शराब सेवन, कुछ दवाएं या वृषण से जुड़ी समस्याएं टेस्टोस्टेरोन कम कर सकती हैं।
क्या करें?
यदि ऊपर बताए गए लक्षण लंबे समय तक बने रहें तो रक्त जांच के जरिए टेस्टोस्टेरोन का स्तर जांचना जरूरी है। डॉक्टर की सलाह के अनुसार जीवनशैली में बदलाव जैसे नियमित व्यायाम, संतुलित आहार, वजन नियंत्रण और पर्याप्त नींद से लाभ मिल सकता है। जरूरत पड़ने पर विशेषज्ञ की देखरेख में टेस्टोस्टेरोन रिप्लेसमेंट थेरेपी दी जा सकती है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल:-
किस उम्र से टेस्टोस्टेरोन कम होना शुरू होता है?
आमतौर पर 30 वर्ष के बाद हर साल लगभग 1 प्रतिशत की कमी हो सकती है लेकिन सभी में लक्षण नहीं दिखते।
क्या लो टेस्टोस्टेरोन से बांझपन हो सकता है?
हां, टेस्टोस्टेरोन शुक्राणु उत्पादन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। स्तर बहुत कम होने पर स्पर्म काउंट घट सकता है।
क्या केवल दवा ही समाधान है?
नहीं। कई मामलों में व्यायाम, वजन कम करना, पर्याप्त नींद, तनाव कम करना और संतुलित आहार से स्तर में सुधार हो सकता है।
क्या टेस्टोस्टेरोन थेरेपी के दुष्प्रभाव होते हैं?
संभव हैं, जैसे रक्त गाढ़ा होना, मुंहासे, स्लीप एपनिया बढ़ना या प्रोस्टेट से जुड़ी समस्या इसलिए बिना डॉक्टर की सलाह सप्लीमेंट लेना खतरनाक हो सकता है।