अनियमित मासिक धर्म, पॉलीसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम (PCOS), फाइब्रॉइड – ये समस्याएं आजकल कम उम्र की महिलाओं में भी बढ़ रही हैं। मुख्य कारण है शरीर में हॉर्मोन का असंतुलन। इसके कारण पीरियड संबंधी समस्याएं, चेहरे पर मुंहासे और अनचाहे बाल भी दिखाई देते हैं। कभी-कभी वजन बढ़ने का भी कारण हॉर्मोन असंतुलन होता है लेकिन जीवनशैली में कुछ बदलाव करके इसे नियंत्रित किया जा सकता है।
हॉर्मोन संतुलन बनाए रखने के तरीके:
संतुलित आहार:
पोषक तत्वों से भरपूर खाना बेहद जरूरी है। रोजाना फाइबर, कार्बोहाइड्रेट, प्रोटीन और हेल्दी फैट का संतुलन बनाए रखें। ताजे फल, सब्जियाँ, दाल, अनाज, नट्स और मछली अधिक खाएं। यह इंसुलिन हॉर्मोन को नियंत्रित रखता है।
शारीरिक व्यायाम:
हॉर्मोन संतुलन के लिए रोज़ कम से कम 30 मिनट व्यायाम करें। भारी व्यायाम जरूरी नहीं है। चलना, तैरना, साइकिल चलाना जैसी हल्की एक्टिविटी भी मदद करती है। इससे वजन भी नियंत्रण में रहता है।
नींद और मानसिक स्वास्थ्य:
अत्यधिक मानसिक तनाव में रहने से कॉर्टिसोल हॉर्मोन का स्तर बढ़ जाता है। इसके कारण कई स्वास्थ्य समस्याएं उत्पन्न होती हैं। वहीं, यदि रोज़ 7-8 घंटे की लगातार नींद न हो तो कॉर्टिसोल और इंसुलिन हॉर्मोन का संतुलन भी बिगड़ता है इसलिए नियमित समय पर सोने की आदत डालें। साथ ही मानसिक स्वास्थ्य का ध्यान रखें। इसके लिए योग, प्राणायाम या ध्यान करने की सलाह दी जाती है।
हाइड्रेशन:
शरीर की गतिविधियों के लिए पर्याप्त पानी पीना जरूरी है। नियमित रूप से पानी पिए और पुदीने का पानी भी मददगार है। मासिक धर्म संबंधी समस्याओं में पुदीने के पत्ते लाभकारी हैं।
इन चीजों से बचें:
प्रोसेस्ड फूड, अधिक नमक और चीनी वाले खाने से बचें। ये वजन बढ़ाते हैं और हॉर्मोन असंतुलन पैदा करते हैं।