मुंबई : महाराष्ट्र में देवेंद्र फड़नवीस सरकार नें औपचारिक रूप से मुस्लिम समुदाय से संबंधित बड़ा फैसला सुनाया है। जिसमें लगभग 50 पिछड़े उपजातियों के लिए आरक्षित विशेष श्रेणी, Special Backward Category A की वैधता संबंधी सरकारी प्रस्ताव को वापस ले लिया गया। यह प्रस्ताव एक दशक पहले पेश किया गया था। इसे वापस लेने के बाद महाराष्ट्र में शिक्षा क्षेत्र में मुस्लिमों के लिए आरक्षण का अंतिम प्रशासनिक मार्ग भी प्रभावी रूप से बंद हो गया।
क्या था यह नियम?
2008 में गठित महमूद-उर-रहमान समिति की रिपोर्ट के आधार पर 2014 में तत्कालीन कांग्रेस-NCP गठबंधन सरकार ने मुसलमानों के लिए सरकारी नौकरी और सरकारी शैक्षणिक संस्थानों में 5 प्रतिशत आरक्षण के संबंध में एक अध्यादेश जारी किया था।
रिपोर्ट में कहा गया था कि राज्य की लगभग 60 प्रतिशत मुस्लिम आबादी गरीबी रेखा के नीचे रहती है। सरकारी नौकरी में उनका प्रतिनिधित्व केवल 4.4 प्रतिशत और स्नातक स्तर पर केवल 2.2 प्रतिशत था।
इस आर्थिक- सामाजिक पिछड़ेपन को दूर करने के लिए जुलाहा, कसाई या मछुआरों जैसी 50 पेशेवर मुस्लिम उपजातियों को SBC-A श्रेणी में शामिल करके जातीय प्रमाण पत्र देने का निर्णय लिया गया था।
कानूनी लड़ाई और नियम की समाप्ति
बाद में यह मामला बॉम्बे हाईकोर्ट पहुंचा। हाईकोर्ट ने मुस्लिमों के लिए 5 प्रतिशत आरक्षण की अनुमति दी। राज्य में सत्ता परिवर्तन के बाद उस अध्यादेश को स्थायी कानून में परिवर्तित नहीं किया गया। 2014 के दिसंबर में ही उस अध्यादेश की कानूनी अवधि समाप्त हो गई। वर्तमान सरकार ने इस दिन एक नई अधिसूचना जारी करके पुराने सभी निर्देश और प्रमाण पत्र देने की प्रक्रिया को औपचारिक रूप से रद्द कर दिया।
सियासी विवाद
इस फैसले के बाद राजनीतिक उठापटक शुरू हो गई। समाजवादी पार्टी के विधायक रईस शेख का दावा है कि वैसे भी इस आरक्षण का कोई लाभ नहीं ले रहा था, लेकिन यह निर्देश मुस्लिम आरक्षण के प्रति सरकार की नकारात्मक मानसिकता को स्पष्ट करता है।
दूसरी ओर महाराष्ट्र के सामाजिक न्याय मंत्री संजय शिरसाट ने कहा कि 2014 में चुनाव से पहले मुसलमानों को खुश करने के लिए कांग्रेस ने यह घोषणा की थी। सही प्रशासनिक प्रक्रिया का पालन नहीं हुआ, इसलिए इसे रद्द किया गया।
वर्तमान में मुसलमानों को क्या आरक्षण मिलेगा?
इस निर्देश के बाद महाराष्ट्र में धर्म के आधार पर मुसलमानों के लिए कोई अलग आरक्षण नहीं रहा। हालांकि मुस्लिम समुदाय के वे लोग जो पहले से OBC या विमुक्त जाति और नोमैडिक ट्राइब्स (VJNT) की सूची में हैं, उन्हें पहले की तरह आरक्षण का लाभ मिलेगा।