औषधि नियामक संस्था ने 29 मल्टीविटामिन दवाओं के अनुचित संयोजन के आरोप पर चिंता जताई है। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के अधीन ड्रग्स टेक्निकल एडवाइजरी बोर्ड (डीटीएबी) ने कोकाटे समिति की सिफारिशों को स्वीकार करते हुए दवाओं की सुरक्षा और तर्कसंगत उपयोग सुनिश्चित करने के लिए यह कदम उठाया है। केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (सीडीएससीओ) ने यह पहल की है।
कोकाटे समिति द्वारा चिह्नित 29 तथाकथित ‘अनुचित’ फिक्स्ड-डोज़ कॉम्बिनेशन (एफडीसी) दवाओं की दोबारा समीक्षा करने का निर्णय लिया गया है। इसके लिए इस विषय को डीटीएबी के अधीन गठित एक उप-समिति के पास भेजा गया है।
2015 में केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय द्वारा गठित विशेषज्ञ समिति की अध्यक्षता सी. के. कोकाटे ने की थी। उन्होंने कई दवा संयोजनों को ‘अनुचित’ करार दिया था। उसी सूची में शामिल 29 एफडीसी दवाओं के पुनर्मूल्यांकन की प्रक्रिया शुरू की गई है।
हालिया एक रिपोर्ट के अनुसार इस मामले को डीटीएबी के अधीन नीलिमा क्षीरसागर की अध्यक्षता वाली उप-समिति को पुनर्मूल्यांकन के लिए भेजा गया है। इससे पहले डीटीएबी ने ऐसी 16 एफडीसी दवाओं पर प्रतिबंध लगाने की सिफारिश भी की थी, जिन्हें इसी समिति ने ‘अनुचित’ बताया था। मुख्य रूप से मरीजों की सुरक्षा और दवाओं की प्रभावशीलता को ध्यान में रखते हुए ये निर्णय लिए जा रहे हैं।
विशेषज्ञों के अनुसार एक से अधिक घटकों को मिलाकर बनाई गई एफडीसी दवाएं तभी तर्कसंगत मानी जाती हैं, जब उनके नैदानिक लाभ और उपयोगिता प्रमाण-आधारित शोध से सिद्ध हों। 2016 में कोकाटे समिति की सिफारिशों के आधार पर केंद्र सरकार ने 344 दवा संयोजनों पर प्रतिबंध लगा दिया था। कारण बताया गया था कि उन दवाओं के लिए पर्याप्त चिकित्सीय औचित्य उपलब्ध नहीं है और उनके सुरक्षित विकल्प पहले से ही बाजार में मौजूद हैं।
इन 29 एफडीसी दवाओं की पुनः समीक्षा के निर्णय को विशेषज्ञ औषधि नियामक व्यवस्था को और मजबूत बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मान रहे हैं।