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मिस-सेलिंग के मुद्दे पर बैंकों को सीतारमण का कड़ा संदेश

ग्राहकों की आवश्यकता न होने पर भी बीमा लेने के लिए दबाव डाला जा रहा है।

By अयंतिका साहा, Posted by : राखी मल्लिक

Feb 24, 2026 12:05 IST

नई दिल्ली : बैंकों का मूल काम ऋण देना और जमा (अमानत) एकत्र करना है, इस बुनियादी जिम्मेदारी से हटकर ग्राहकों को जबरन वित्तीय उत्पाद, विशेषकर बीमा बेचने की प्रवृत्ति के खिलाफ केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बैंकों को कड़ा संदेश दिया। सोमवार को उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि इस प्रकार की ‘मिस-सेलिंग’ या भ्रामक बिक्री अब केवल अनैतिक ही नहीं, बल्कि कानून की नजर में अपराध भी है। उन्होंने बैंकों को चेतावनी दी कि भारतीय न्याय संहिता के तहत इसके खिलाफ उपयुक्त कार्रवाई की जा सकती है।

बजट के बाद दिए जाने वाले नियमित भाषण के उपरांत रिर्जव बैंक ऑफ इंडिया के केंद्रीय निदेशक मंडल के साथ बैठक के बाद वित्त मंत्री ने कहा कि कई मामलों में देखा जा रहा है कि बैंक अपने मूल कार्यों की तुलना में बीमा बेचने में अधिक समय दे रहे हैं। उन्होंने बताया कि यह मुद्दा लंबे समय से उनकी नाराजगी का कारण रहा है। ग्राहकों की आवश्यकता न होने पर भी उन पर बीमा लेने का दबाव बनाया जा रहा है, ऐसी कई शिकायतें सामने आ रही हैं।

निर्मला के अनुसार अब तक यह मामला नियामक संस्थाओं के बीच समन्वय की कमी के कारण नजर से ओझल रहा। बैंकिंग नियामक इसे बीमा नियामक के दायरे का विषय मानता था, जबकि बीमा नियामक का कहना था कि बैंक उसके सीधे नियंत्रण में नहीं आते। परिणामस्वरूप बीच में आम ग्राहक ही परेशानी झेलते रहे। विशेषकर गृह ऋण जैसे मामलों में, संपत्ति पहले से गिरवी होने के बावजूद अतिरिक्त बीमा लेने के लिए क्यों कहा जा रहा है यह सवाल कई जमाकर्ताओं ने उठाया है।

हाल ही में इस विषय पर सख्त कदम उठाने के संकेत शीर्ष बैंक ने भी दिए हैं। फरवरी के मध्य जारी मसौदा दिशा-निर्देश में कहा गया है कि यदि कोई बैंक या वित्तीय संस्था ग्राहक को गुमराह कर कोई उत्पाद बेचती है, तो ग्राहक द्वारा दी गई पूरी राशि लौटानी होगी। इतना ही नहीं, उस बिक्री के कारण ग्राहक को जो वित्तीय नुकसान हुआ है, उसके लिए मुआवजा भी देना होगा। मसौदा दिशा-निर्देश पर जनमत देने के लिए 4 मार्च तक का समय दिया गया है और नए नियम को 1 जुलाई से लागू करने की योजना है। वित्त मंत्री ने कहा कि यह पहल अत्यंत आवश्यक है और बैंकों को स्पष्ट संदेश दिया जा रहा है कि मिस-सेलिंग अब बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

उन्होंने बैंकों को ग्राहकों की आवश्यकता समझने पर जोर देने की सलाह दी। व्यवसाय की प्रकृति, जोखिम और वित्तीय क्षमता—इन सभी पहलुओं को ध्यान में रखकर ही सेवाएं प्रदान की जानी चाहिए। व्यक्तिगत ग्राहकों के मामलों में भी यही बात लागू होती है। बीमा या अन्य वित्तीय उत्पाद बेचने के बजाय सस्ती जमा बढ़ाने और ऋण वितरण जैसे मूल कार्यों पर ध्यान देना अधिक महत्वपूर्ण है।

संजय मलहोत्रा ने इस दिन बैंकिंग व्यवस्था की समग्र स्थिति पर भी टिप्पणी की। उनके अनुसार वर्तमान में बैंकिंग प्रणाली में जमा वृद्धि लगभग 12.5 प्रतिशत है, जबकि ऋण वृद्धि लगभग 14.5 प्रतिशत है। आर्थिक वृद्धि और मुद्रास्फीति की स्थिति की समीक्षा के बाद ही ब्याज दरों पर भविष्य का निर्णय लिया जाएगा।

इस संबंध में राज्य में All India Nationalised Bank Officers Association के सचिव संजय दास ने कहा कि बैंक कर्मचारियों को बीमा सहित विभिन्न वित्तीय उत्पाद बेचने के लिए लक्ष्य निर्धारित किए जा रहे हैं। लक्ष्य पूरा न करने पर समीक्षा बैठकों में संबंधित कर्मचारियों को फटकार का सामना करना पड़ता है। इस लक्ष्य को पूरा करने के दबाव में बैंक कर्मचारी ग्राहकों को गलत जानकारी देकर या विभिन्न शर्तें छिपाकर वित्तीय उत्पाद बेचने को मजबूर हो रहे हैं। हम लंबे समय से इस विषय पर ध्यान देने की मांग करते आ रहे हैं। क्रॉस-सेलिंग किसी भी तरह से मिस-सेलिंग में न बदल जाए, यह सुनिश्चित करने की बात भी कही गई है। उन्होंने कहा कि वित्त मंत्री ने काफी देर से इस विषय पर चेतावनी दी है।

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