कोलकाताः पाकिस्तान अगर सेमीफाइनल में क्वालीफाई करता है तो वो 4 मार्च को कोलंबो में खेलेगा, जबकि श्रीलंका क्वालीफाई करता है और उसका मुकाबला भारत से नहीं होता, तो वो भी कोलंबो में ही अपना सेमीफाइनल खेलेगा। टी-20 विश्व कप 2026 के नॉकआउट चरण से पहले ही आयोजन को लेकर अनिश्चितता का माहौल बन गया है।
आईसीसी ने 24 फरवरी 2026 की शाम 7 बजे से सेमीफाइनल और फाइनल के टिकटों की बिक्री शुरू कर दी, जबकि सेमीफाइनल-1 और फाइनल के वेन्यू अभी भी शर्तों के अधीन हैं। टिकट आधिकारिक पोर्टल tickets.t20worldcup.com और संबंधित प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध हैं।
आईसीसी ने स्टेकहोल्डर्स को ईमेल के जरिए संभावित बदलावों की सूचना दी है। हालांकि, आम प्रशंसकों के लिए यह स्थिति उलझन भरी है-जब स्थान “फ्लोटिंग” हैं, तो यात्रा की योजना किस आधार पर बने?
सेमीफाइनल-1: कोलकाता या कोलंबो?
4 मार्च को होने वाला सेमीफाइनल-1 या तो कोलकाता के इडन गार्डेन्स में खेला जाएगा या फिर कोलंबो के आर प्रेमदासा स्टेडियम में। यह पूरी तरह इस पर निर्भर है कि पाकिस्तान और श्रीलंका की टीमें अंतिम चार में जगह बनाती हैं या नहीं।
यदि पाकिस्तान सेमीफाइनल में पहुंचता है, तो यह मुकाबला कोलंबो शिफ्ट होगा। अगर पाकिस्तान नहीं पहुंचता, लेकिन श्रीलंका पहुंचता है और उसका मुकाबला भारत से नहीं है, तब भी मैच कोलंबो में खेला जाएगा। केवल तब, जब पाकिस्तान और श्रीलंका दोनों सेमीफाइनल में नहीं पहुंचते, मुकाबला कोलकाता में रहेगा।
5 मार्च का सेमीफाइनल-2 मुंबई के वानखेडे स्टेडियम में तय है। सामान्य परिस्थितियों में भारत यहां खेलेगा, सिवाय उस स्थिति के जब उसका मुकाबला पाकिस्तान से हो।
फाइनल: अहमदाबाद तय, पर शर्त के साथ
8 मार्च का फाइनल सामान्य रूप से अहमदाबाद के नरेंद्र मोदी स्टेडियम में निर्धारित है। लेकिन यदि पाकिस्तान फाइनल में पहुंचता है, तो मुकाबला कोलंबो स्थानांतरित कर दिया जाएगा।
यह व्यवस्था तथाकथित “हाइब्रिड मॉडल” का हिस्सा है, जो भारत और श्रीलंका में संयुक्त मेजबानी तथा पाकिस्तान के मैच श्रीलंका में कराने के फार्मूले के तहत बना। यह मॉडल बीसीसीआई और पीसीबी के बीच आईसीसी की मध्यस्थता से तैयार हुआ था।
रिफंड के नियम और क्रिकेट प्रेमियों की मुश्किलें
आईसीसी ने स्पष्ट किया है कि यदि वेन्यू बदलता है, तो टिकटधारकों को मूल टिकट राशि वापस कर दी जाएगी। हालांकि, पेमेंट गेटवे या प्लेटफॉर्म शुल्क की वापसी नहीं होगी। इसका अर्थ है कि दर्शकों को आंशिक आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है।
वास्तविक चुनौती यात्रा और आवास की है। यदि किसी ने कोलकाता के लिए टिकट खरीदा और मैच कोलंबो चला गया, तो उसे अंतिम समय में अंतरराष्ट्रीय यात्रा और होटल बुकिंग करनी होगी-जो महंगी और असुविधाजनक हो सकती है। यही दुविधा कोलंबो के प्रशंसकों पर उलट स्थिति में लागू होती है।
आईसीसी का क्या कहना है?
आईसीसी का तर्क है कि यह व्यवस्था टीमों के प्रदर्शन पर आधारित है और पहले से तय हाइब्रिड मॉडल के अनुरूप है। टूर्नामेंट भारत और श्रीलंका में आठ वेन्यू पर आयोजित हो रहा है। भारत में टिकट की शुरुआती कीमत 100 रुपये रखी गई है, जिससे अधिकतम दर्शक भागीदारी सुनिश्चित हो सके।
फिर भी आलोचकों का कहना है कि विश्व कप जैसे वैश्विक आयोजन में टिकट बिक्री से पहले वेन्यू की स्पष्टता जरूरी थी। यह निर्णय खेल प्रशासन के भीतर चल रहे राजनीतिक और रणनीतिक समीकरणों को भी उजागर करता है, जिनका सीधा असर प्रशंसकों की योजना और खर्च पर पड़ रहा है।
खेल का रोमांच लेकिन आयोजन में परेशानी
टी-20 विश्व कप 2026 का नॉकआउट चरण खेल के लिहाज से जितना रोमांचक होने वाला है, आयोजन प्रबंधन के स्तर पर उतना ही जटिल भी दिख रहा है। आईसीसी ने नियमों के दायरे में लचीलापन रखा है, लेकिन इससे प्रशंसकों के सामने अनिश्चितता की स्थिति बन गई है।
अब नजर इस बात पर होगी कि क्वालिफिकेशन का गणित किस दिशा में जाता है। यह भी जानना दिलचस्प होगा कि क्या आईसीसी भविष्य में ऐसे बड़े आयोजनों में स्पष्टता और पारदर्शिता के संतुलन को बेहतर तरीके से साध पाता है।