विधानसभा चुनाव से ठीक पहले केरल का नाम बदलकर 'केरलम' कर दिया गया है। मंगलवार को केंद्रीय कैबिनेट की बैठक में यह फैसला लिया गया। राज्य के मुख्यमंत्री पिनराई विजयन के प्रस्ताव को नरेंद्र मोदी (Narendra Modi) की सरकार ने स्वीकार कर लिया है। लेकिन पश्चिम बंगाल यानी West Bengal का नाम बदलकर उसे 'बांग्ला' (Bangla) करने के लिए केंद्र सरकार राजी नहीं है? एक बार फिर से मुख्यमंत्री ममता बनर्जी (Mamata Banerjee) ने यह सवाल उठाते हुए केंद्र सरकार पर निशाना साधा।
ममता बनर्जी ने स्पष्ट कहा कि उन्हें मिल गया क्योंकि आज केरल में भाजपा के साथ सीपीएम का एक गठबंधन बन रहा है। यह अब कोई अलिखित गठबंधन नहीं बल्कि लिखित गठबंधन ही बन गया है। आज की घटना इसी बात का सबूत है।
मुख्यमंत्री ने कहा, 'केंद्र की भाजपा सरकार ने केरल राज्य सरकार के प्रस्ताव को स्वीकार कर लिया है। मैं केरल के लोगों को अपनी शुभकामनाएं देती हूं। लेकिन एक बात सोचकर ही मैं हैरान हो रही हूं, राज्य सरकार के अनुमोदन से सब जगहों का नाम बदला जाता है। बंगाल में पिछले लंबे समय से हम WYZ के बीच क्यों फंसे हुए हैं?' उन्होंने कहा कि हमारे बच्चे जब परीक्षा देने जाते हैं, इंटरव्यू देने जाते हैं, राज्य के आधार पर आखिरी बेंच पर बैठना पड़ता है। मुझे भी बतौर मुख्यमंत्री कहीं जाने पर सबसे आखिरी में ही बोलने का मौका मिलता है।
ममता बनर्जी का कहना है कि बंगाल को वंचित करने का यह एक और भी उदाहरण है। वर्ष 2018 से बंगाल का नाम परिवर्तित करने का आवेदन लंबित है। बंगाल के लोगों को वंचित किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि बंगाल की ऐतिहासिकता, बंगाल की संस्कृति, सभ्यता, चिन्ताधारा सब कुछ सोचकर ही राज्य का नाम 'बांग्ला' करना चाहती थी। विधानसभा में दो से तीन बार बिल भी पास करवा चुकी हूं। पहली बार बोला गया कि बांग्ला-हिंदी-अंग्रेजी तीनों ही एक हो। फिर विधानसभा में बिल पास करवाया कि बांग्ला-हिंदी-अंग्रेजी में नाम 'बांग्ला' ही होगा।
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मुख्यमंत्री ने कहा कि जितनी बार प्रधानमंत्री या गृहमंत्री से मिली हूं, बार-बार बोली। पता नहीं क्यों, शायद वे बंगाल विरोधी है इसलिए ऐसा करते हैं। इससे पहले कई बार ममता बनर्जी ने कहा था कि राज्य का नाम अगर 'बांग्ला' होता है तो यह अंग्रेजी के B अक्षर से शुरू होगा। इस वजह से विभिन्न जगहों पर जहां राज्य के नाम के पहले अक्षर के आधार पर मौका मिलता है, वहां हमारा राज्य आगे आ सकेगा। वर्तमान में West Bengal नाम होने की वजह से पहला अक्षर W होता है। इसलिए विभिन्न मंचों पर राज्य को सबसे आखिर में बोलने का मौका मिलता है।
मुख्यमंत्री ने पहले यह भी कहा था कि किसी भी बैठक में जाने पर हमें आखिर तक बैठे रहना पड़ता है क्योंकि राज्य का नाम W से शुरू होता है। वास्तव में बंगाल के महत्व को कम करने के लिए ही केंद्र इस बात पर राजी नहीं हो रहा है। हालांकि नाम बदलने को लेकर शुरुआत से ही विदेश मंत्रालय की दलील रही है कि 'बांग्ला' नाम बांग्लादेश से मिलता-जुलता होने की वजह से असमंजस की स्थिति पैदा हो सकती है।
हालांकि ममता बनर्जी शुरुआत से ही यह दलील मानने को राजी नहीं हैं। उन्होंने कहा था कि पाकिस्तान में भी पंजाब है और भारत में भी है। इसलिए अगर पड़ोसी देश का नाम बांग्लादेश है इसलिए राज्य का नाम 'बांग्ला' नहीं हो सकता है, इस दलील में कोई दम नहीं है। वर्ष 2026 के विधानसभा चुनाव से पहले एक बार फिर से राज्य के नाम को न बदलने के मुद्दे पर तृणमूल ने केंद्र सरकार पर वंचित करने का आरोप लगाया है।