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कोलकाता हाईकोर्ट का असाधारण कदम: न्यायिक अधिकारियों की सभी छुट्टियां रद्द

सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद SIR मामले में ‘लॉजिकल डिस्क्रेपेंसी’ की जांच तेज, तैनाती के लिए तत्काल तैयारी।

By कौशिक भट्टाचार्य, Posted by: श्वेता सिंह

Feb 25, 2026 01:23 IST

कोलकाताः सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद कोलकाता हाईकोर्ट ने एक अभूतपूर्व प्रशासनिक कदम उठाते हुए राज्य भर के न्यायिक अधिकारियों की सभी प्रकार की छुट्टियां रद्द कर दी हैं। मंगलवार को जारी अधिसूचना में हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार ने स्पष्ट किया कि सिविल जज (सीनियर डिवीजन), चीफ ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट, एडिशनल चीफ ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट, सिविल जज (जूनियर डिवीजन) और ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट अब अगले आदेश तक किसी भी प्रकार की छुट्टी नहीं ले सकेंगे।

यह फैसला ऐसे समय में आया है जब राज्य में SIR से जुड़े मामले पर तेजी से कार्रवाई चल रही है। पिछले शुक्रवार को इस मामले की सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने ‘लॉजिकल डिस्क्रेपेंसी’ की जांच के लिए न्यायिक अधिकारियों की नियुक्ति का निर्देश दिया था। इन अधिकारियों की नियुक्ति की जिम्मेदारी कोलकाता हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश को सौंपी गई थी।

शनिवार को इस विषय पर मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता में एक अहम बैठक हुई, जिसमें आयोग के प्रतिनिधि, राज्य के मुख्य चुनाव अधिकारी, मुख्य सचिव और अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल शामिल हुए। इसके तुरंत बाद मंगलवार को हाईकोर्ट रजिस्ट्रार की ओर से यह सख्त निर्देश जारी कर दिया गया।

अधिसूचना के अनुसार, मंगलवार से अगली सूचना तक कोई भी न्यायिक अधिकारी अवकाश नहीं ले सकेगा। डिपुटेशन पर तैनात अधिकारी भी इस आदेश के दायरे में आएंगे। ‘स्टेशन लीव’ की भी अनुमति नहीं होगी। केवल गंभीर चिकित्सकीय आपात स्थिति में ही छुट्टी स्वीकृत की जा सकेगी। जो अधिकारी फिलहाल अवकाश पर हैं, उन्हें बुधवार दोपहर तक अपने-अपने न्यायालयों और कार्यालयों में कार्यभार ग्रहण करने का निर्देश दिया गया है। यहां तक कि पहले से स्वीकृत छुट्टियां भी निरस्त कर दी गई हैं।

सिर्फ अवकाश ही नहीं, बल्कि प्रशिक्षण कार्यक्रमों पर भी रोक लगा दी गई है। प्रोबेशनरी अधिकारियों के प्रशिक्षण को छोड़कर बाकी सभी प्रशिक्षण कार्यक्रम अगले आदेश तक स्थगित रहेंगे। आगामी 15 दिनों में वेस्ट बंगाल ज्यूडिशियल एकेडमी में प्रस्तावित प्रशिक्षण भी फिलहाल रोक दिया गया है। राज्य के बाहर आयोजित प्रशिक्षण या सेमिनार में भाग लेने के लिए दी गई पूर्व स्वीकृतियां भी रद्द कर दी गई हैं।

विश्लेषकों का मानना है कि यह कदम न्यायिक तंत्र को पूरी तरह सक्रिय मोड में लाने का संकेत है, ताकि सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का त्वरित और प्रभावी अनुपालन सुनिश्चित किया जा सके। न्यायिक अधिकारियों की व्यापक तैनाती से SIR मामले में तथ्यों की गहन जांच और रिपोर्टिंग की प्रक्रिया तेज हो सकती है।

हालांकि, इतनी व्यापक स्तर पर छुट्टियां रद्द करने का निर्णय न्यायपालिका के प्रशासनिक इतिहास में विरल माना जा रहा है। इससे स्पष्ट है कि अदालत इस मामले को अत्यंत गंभीरता से ले रही है और किसी भी तरह की देरी या ढिलाई की गुंजाइश नहीं छोड़ना चाहती।

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