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बंगाल में 50 लाख दस्तावेज़ों की जांच बाकी! पड़ोसी राज्य से न्यायाधीश लाकर SIR पूरा करने का अदालत का निर्देश

पश्चिम बंगाल में SIR का काम पूरा करने के लिए सुप्रीम कोर्ट का फिर नया निर्देश

By अमित चक्रवर्ती, Posted by डॉ.अभिज्ञात

Feb 24, 2026 17:32 IST

नयी दिल्ली/कोलकाताः SIR (स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन) के दस्तावेज़ों की जांच को लेकर सुप्रीम कोर्ट का नया निर्देश आया है। बड़ी संख्या में दस्तावेज़ों में तथ्यगत असंगतियों की जांच अभी बाकी है। मंगलवार को कलकत्ता हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश सुजय पाल की स्टेटस रिपोर्ट पढ़ने के बाद शीर्ष अदालत ने निर्देश दिया कि SIR का काम पूरा करने के लिए पड़ोसी राज्यों से न्यायाधीश लाए जाएं।

राज्य के वकील ने सवाल उठाया कि यदि दूसरे राज्यों से न्यायाधीश आएंगे तो क्या वे बांग्ला भाषा समझ पाएंगे? इस पर अदालत ने कहा कि इसके अलावा कोई और विकल्प नहीं है।

मंगलवार को SIR के काम को लेकर कलकत्ता हाई कोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट में स्टेटस रिपोर्ट दाखिल की। सूत्रों के अनुसार मुख्य न्यायाधीश सुजय पाल ने बताया कि सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद लगभग 250 न्यायिक अधिकारियों की नियुक्ति की गई है। करीब 50 लाख दस्तावेज़ों की जांच अभी बाकी है। यदि एक अधिकारी प्रतिदिन 250 दस्तावेज़ों की जांच करे, तब भी इस काम में 80 दिन लगेंगे।

यह रिपोर्ट मिलने के बाद सुप्रीम कोर्ट ने नया निर्देश जारी किया।

हालांकि SIR मामले की सुनवाई 10 मार्च को होनी थी, लेकिन सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश के पीठ ने मंगलवार को ही इस मामले की आपात सुनवाई की। इस दौरान मुख्य न्यायाधीश सूर्य कांत ने कहा,

“करीब 80 लाख तार्किक विसंगतियां और अनमैप्ड सूचियां मौजूद हैं। इनमें से लगभग 50 लाख दस्तावेज़ों की जांच के लिए जिला न्यायाधीश और अतिरिक्त जिला न्यायाधीश स्तर के 250 न्यायिक अधिकारियों को जिम्मेदारी दी गई है। इस कार्य में हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश तीन वर्ष या उससे अधिक अनुभव वाले सिविल जज (सीनियर और जूनियर डिवीजन) स्तर के अधिकारियों को भी शामिल कर सकते हैं।”

मुख्य न्यायाधीश सूर्य कांत ने ओडिशा और झारखंड हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीशों से भी अनुरोध किया कि यदि कलकत्ता हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश उनकी सहायता मांगें तो उसे सहानुभूतिपूर्वक और तात्कालिक आधार पर विचार किया जाए।

अदालत का मत है कि ओडिशा और झारखंड बंगाल के पड़ोसी राज्य हैं, इसलिए वहां के न्यायाधीशों को यहां की भाषा की कुछ समझ होगी। मुख्य न्यायाधीश सूर्य कांत ने कहा, “इस स्थिति में हमारे पास और कोई विकल्प नहीं है। इतिहास बताता है कि कभी ये राज्य एक ही प्रशासनिक ढांचे का हिस्सा थे। इसलिए स्थानीय भाषा या बोली को कुछ हद तक समझ सकेंगे।”

सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने यह भी कहा कि जिन मतदाताओं ने आधार कार्ड, माध्यमिक परीक्षा का एडमिट कार्ड और माध्यमिक उत्तीर्ण प्रमाणपत्र दस्तावेज़ के रूप में जमा किए हैं, इस पर विचार किया जाए।

जांच प्रक्रिया चुनाव आयोग की जारी अधिसूचना के अनुसार ही होगी। 14 फरवरी से पहले जमा किए गए दस्तावेज़ ही स्वीकार किए जाएंगे। जो अतिरिक्त सूची प्रकाशित होगी, उसे 28 फरवरी को प्रकाशित सूची के रूप में ही माना जाएगा।

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