नई दिल्ली: केंद्र सरकार ने नई पीएमओ कॉम्प्लेक्स ‘सेवा तीर्थ’ में अपनी पहली कैबिनेट बैठक आयोजित की और इसे सिर्फ एक प्रशासनिक बदलाव नहीं बल्कि शासन की सोच में बदलाव के रूप में पेश किया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई इस बैठक में ‘सेवा संकल्प रेजोल्यूशन’ पास किया गया। इसमें कहा गया कि सेवा तीर्थ से लिए जाने वाले हर फैसले की नींव ‘नागरिक देवो भव’ यानी “नागरिक ही सर्वोच्च” की भावना पर होगी। सरकार ने यह भी स्पष्ट किया कि यह परिसर सत्ता दिखाने का मंच नहीं है, बल्कि पूरे देश के लोगों के सशक्तिकरण का केंद्र बनेगा।
‘सेवा तीर्थ’ उसी जगह बना है, जहां पहले ब्रिटिश शासन के समय अस्थायी बैरकें थीं। इसे पुराने प्रशासन से आधुनिक, पारदर्शी और आत्मनिर्भर प्रशासन की ओर बदलाव का प्रतीक माना जा रहा है। 13 फरवरी 2026 को प्रधानमंत्री ने इसका उद्घाटन किया था। इसके बाद पीएमओ, कैबिनेट सचिवालय और राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद सचिवालय को यहां स्थानांतरित कर दिया गया। केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बताया कि यहां की कार्य संस्कृति संविधान की मूल भावना पर आधारित होगी और हर नीति आम लोगों की जरूरतों और आकांक्षाओं का ध्यान रखेगी।
पीटीआई की रिपोर्ट के मुताबिक, रेजोल्यूशन में यह भी कहा गया कि सेवा तीर्थ से काम करने का तरीका तेज, समाधान-उन्मुख और जवाबदेह होगा। ‘मिनिमम गवर्नमेंट, मैक्सिमम गवर्नेंस’ के मंत्र को दोहराते हुए सरकार ने सही नीति, ईमानदार इरादा और सक्षम नेतृत्व को विकसित भारत के लिए जरूरी बताया।
बैठक में पिछले दशक की उपलब्धियों का भी जिक्र किया गया। सरकार के अनुसार, पिछले दस साल में 25 करोड़ से अधिक लोगों को गरीबी से बाहर लाया गया। आयुष्मान भारत योजना के तहत करोड़ों लोगों को स्वास्थ्य सुरक्षा मिली। प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना से करीब 80 करोड़ लोगों को खाद्य सुरक्षा मिली। स्वच्छ भारत मिशन के तहत 12 करोड़ से ज्यादा शौचालय बनाए गए, 4 करोड़ से अधिक घर बने और जल जीवन मिशन के जरिए 15.69 करोड़ ग्रामीण घरों में नल से पानी की सुविधा दी गई। साथ ही जीएसटी, डीबीटी और डिजिटल इंडिया जैसे कदमों से शासन अधिक पारदर्शी और कुशल हुआ।
सरकार ने सेवा तीर्थ को ‘विकसित भारत 2047’ की योजना से जोड़ा और कहा कि यहां लिए गए फैसले आने वाली पीढ़ियों के भविष्य को आकार देंगे। यह जगह राष्ट्रीय आकांक्षाओं का केंद्र बनेगी।
हालांकि, किसी भी नया भवन या परियोजना की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि वहां से निकले फैसले आम लोगों के जीवन में कितनी राहत और अवसर ला पाते हैं। आने वाला समय ही दिखाएगा कि सेवा तीर्थ सिर्फ प्रतीकात्मक बदलाव है या शासन प्रणाली में वास्तविक सुधार का आधार बन रहा है।