मुंबईः महाराष्ट्र के बारामती में 28 जनवरी को हुए भीषण विमान हादसे में तत्कालीन उपमुख्यमंत्री अजित पवार सहित पांच लोगों की मौत के बाद अब इस घटना को लेकर नए सवाल खड़े हो गए हैं। यह दुर्घटना मात्र तकनीकी विफलता थी या इसके पीछे गंभीर लापरवाही - इस पर संदेह गहराता जा रहा है। नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (DGCA) की हालिया ‘स्पेशल सेफ्टी ऑडिट’ रिपोर्ट ने कई चौंकाने वाली बातें उजागर की हैं।
यह हादसा वीएसआर वेंचर्स प्राइवेट लिमिटेड द्वारा संचालित लियरजेट विमान के साथ हुआ था। DGCA की जांच में एयरवर्दिनेस (उड़ान योग्यता), एयर सेफ्टी और फ्लाइट ऑपरेशंस से जुड़े कई मानकों में गंभीर खामियां पाई गई हैं। जांच अधिकारियों ने कंपनी की कार्यप्रणाली पर असंतोष जताया है और माना है कि नियमों के पालन में गंभीर चूक हुई है।
इसी के चलते मंगलवार को DGCA ने वीएसआर वेंचर्स के पास मौजूद बाकी चार लियरजेट विमानों को भी ग्राउंड कर दिया। नियामक संस्था ने स्पष्ट किया है कि जब तक सभी सुरक्षा और संचालन संबंधी मानकों का पूर्ण अनुपालन नहीं किया जाता, तब तक ये विमान उड़ान नहीं भर सकेंगे। साथ ही कंपनी से यह भी पूछा गया है कि नियमों का पालन क्यों नहीं हुआ और लापरवाही की वजह क्या थी।
इन खुलासों से पहले ही इस दुर्घटना को लेकर राजनीतिक बयानबाजी तेज हो चुकी थी। अजित पवार के भतीजे और एनसीपी (एसपी) नेता रोहित पवार ने इसे सामान्य हादसा मानने से इनकार किया है। उनका दावा है कि इसके पीछे गहरी राजनीतिक या व्यावसायिक साजिश हो सकती है। उन्होंने यह भी कहा कि विमान में अतिरिक्त ईंधन टैंक होने और पायलट के पहले शराब सेवन के आरोप में निलंबित रहने का रिकॉर्ड संदिग्ध परिस्थितियों की ओर इशारा करता है।
रोहित पवार ने जांच की निष्पक्षता पर भी सवाल उठाए हैं। उन्होंने वीएसआर वेंचर्स और सत्तारूढ़ दल के कुछ नेताओं के बीच कथित संबंधों का आरोप लगाया है। मामले की गंभीरता को देखते हुए उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर CBI जांच की मांग की है और नागरिक उड्डयन मंत्री के इस्तीफे की भी मांग की है।
इस हादसे की प्रारंभिक जांच रिपोर्ट 27 फरवरी को आने की संभावना है। माना जा रहा है कि इस रिपोर्ट से घटना के कारणों और जिम्मेदारियों को लेकर कुछ और स्पष्टता सामने आएगी। फिलहाल DGCA की कार्रवाई ने यह संकेत जरूर दे दिया है कि मामला केवल एक साधारण दुर्घटना भर नहीं माना जा रहा, बल्कि सुरक्षा मानकों की गंभीर समीक्षा के दायरे में आ चुका है।