तेलंगानाः तेलंगाना में एक ऐसे बुजुर्ग हैं, जिन्होंने अपनी सेवानिवृत्ति को आराम का समय नहीं, बल्कि सेवा का अवसर बना लिया। कोटा दयानंद पिछले नौ वर्षों से अस्पतालों में आने वाले गरीब मरीजों और उनके परिजनों को मुफ्त भोजन उपलब्ध करा रहे हैं।
हर दिन वे करीब 300 से 500 जरूरतमंद लोगों तक खाना पहुंचाते हैं। इनमें ज्यादातर वे लोग होते हैं, जो इलाज के लिए दूर-दराज से आते हैं और आर्थिक तंगी के कारण दो वक्त की रोटी जुटाने में भी कठिनाई महसूस करते हैं।
दयानंद ने अपनी इस पहल को संगठित रूप देने के लिए बड़ासिद्धि विनायक सेवा समिति की स्थापना की। धीरे-धीरे उनके साथ अन्य सेवानिवृत्त सरकारी कर्मचारी भी जुड़ते गए।
आज यह टीम सुबह, दोपहर और रात-तीनों समय भोजन की व्यवस्था करती है। अस्पताल प्रशासन ने भी इस नेक कार्य में सहयोग दिया है। भोजन वितरण के लिए अस्पताल परिसर में एक शेड उपलब्ध कराया गया है। डॉक्टरों ने भी आर्थिक सहयोग जुटाने में मदद की है।
दयानंद की इस पहल में स्थानीय नागरिक भी सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं। घरों में होने वाले कार्यक्रमों में यदि भोजन बच जाता है, तो लोग उसे सेवा समिति को सौंप देते हैं ताकि जरूरतमंदों तक पहुंच सके।
प्रवीण नाम के एक युवक बताते हैं कि उनके पिता अस्पताल में भर्ती हैं। इलाज के साथ-साथ रोज बाहर से खाना खरीदना उनके लिए संभव नहीं था। ऐसे में दयानंद द्वारा दिया गया मुफ्त भोजन उनके परिवार के लिए बड़ी राहत साबित हुआ।
देश में भूख और गरीबी आज भी बड़ी चुनौती है। ऐसे समय में दयानंद जैसे लोग समाज के लिए प्रेरणा बनकर सामने आते हैं। उनका कहना है कि वे सिर्फ इतना चाहते हैं कि कोई भी व्यक्ति अस्पताल में भूखा न रहे। उन्होंने संकल्प लिया है कि जीवन के अंतिम दिन तक वे इस सेवा कार्य को जारी रखेंगे। दयानंद की यह पहल बताती है कि बदलाव के लिए बड़े पद या संसाधन नहीं, बल्कि बड़ा दिल चाहिए।