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32 हजार प्राइमरी टीचरों की नौकरी पर फिर घमासान, सुप्रीम कोर्ट पहुंचा मामला

हाई कोर्ट की डिवीजन बेंच के आदेश को दी गई चुनौती, सिंगल बेंच ने पहले रद्द की थीं सभी नियुक्तियां

By अमित चक्रवर्ती, Posted by: श्वेता सिंह

Feb 25, 2026 19:14 IST

कोलकाताः पश्चिम बंगाल में 32,000 प्राइमरी शिक्षकों की नौकरी को लेकर कानूनी लड़ाई अब सुप्रीम कोर्ट पहुंच गई है। कलकत्ता हाई कोर्ट की डिवीजन बेंच द्वारा शिक्षकों की नौकरी बहाल रखने के आदेश को चुनौती देते हुए मुख्य वादी ने सुप्रीम कोर्ट में स्पेशल लीव पिटीशन (SLP) दायर की है।

याचिका में आरोप लगाया गया है कि डिवीजन बेंच ने कथित भ्रष्टाचार के बावजूद “मानवता” के आधार पर नौकरियां बरकरार रखीं, जो कानून के दायरे में नहीं आता। वादी का दावा है कि भर्ती प्रक्रिया में गड़बड़ियों के पर्याप्त सबूत मौजूद थे, इसके बावजूद सामूहिक राहत दी गई।

सिंगल बेंच का सख्त फैसला

इससे पहले, मई 2023 में हाई कोर्ट के पूर्व जस्टिस अभिजीत गंगोपाध्याय की सिंगल बेंच ने पूरी भर्ती प्रक्रिया में भ्रष्टाचार के प्रमाण मिलने का हवाला देते हुए 32,000 प्राइमरी टीचरों की नौकरियां रद्द कर दी थीं। अदालत ने माना था कि चयन प्रक्रिया में गंभीर अनियमितताएं हुई हैं, जिसके कारण सभी नियुक्तियों को निरस्त किया जाना जरूरी है।

डिवीजन बेंच ने पलटा आदेश

हालांकि, दिसंबर में जस्टिस तपोब्रत चक्रवर्ती और जस्टिस रीताब्रतकुमार मित्रा की डिवीजन बेंच ने सिंगल बेंच के आदेश को पलट दिया। डिवीजन बेंच ने कहा कि भर्ती प्रक्रिया में किसी बड़े पैमाने की गड़बड़ी के ठोस प्रमाण नहीं मिले हैं।

अदालत ने यह भी कहा कि कुछ उम्मीदवारों की कथित अनियमितताओं के आधार पर सभी 32,000 शिक्षकों की नौकरी रद्द करना उचित नहीं होगा। साथ ही यह भी स्पष्ट किया गया कि भ्रष्टाचार की जांच अभी जारी है।

पहले से थी सुप्रीम कोर्ट जाने की तैयारी

डिवीजन बेंच के फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट जाने की संभावना पहले से जताई जा रही थी। इसी को देखते हुए प्राइमरी एजुकेशन बोर्ड ने पहले ही सुप्रीम कोर्ट में कैविएट दाखिल कर दी थी, ताकि किसी भी एकतरफा आदेश से पहले उसका पक्ष सुना जा सके।

अब यह मामला सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन है। आने वाले दिनों में यह तय होगा कि 32,000 प्राइमरी शिक्षकों की नौकरी बरकरार रहेगी या सिंगल बेंच का रद्दीकरण आदेश फिर से लागू होगा। इस पूरे घटनाक्रम पर राज्य की शिक्षा व्यवस्था और हजारों परिवारों की नजर टिकी हुई है।

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