कोलकाताः पश्चिम बंगाल में स्पेशल इंटेंसिव रिविजन (SIR) प्रक्रिया के तहत केंद्रीय ऑब्जर्वरों को मतदाता रिकॉर्ड समीक्षा का जिम्मा दिया गया है। इस बीच बंगाल भाजपा ने अब इन केंद्रीय अधिकारियों पर भी अविश्वास जताया है। मंगलवार को भाजपा के राज्य अध्यक्ष शमीक भट्टाचार्य ने आरोप लगाया कि कुछ केंद्रीय अधिकारी राज्य सरकार के अधिकारियों के साथ संबंध बनाए हुए हैं और तृणमूल के कार्यों में शामिल हो सकते हैं।
शमीक ने चेतावनी दी कि यदि कोई केंद्रीय अधिकारी इस तरह के संबंध बनाए, तो उन्हें भविष्य में इसका खामियाजा भुगतना पड़ेगा। उन्होंने कहा, “एसडीओ और बीडीओ पर डीएम द्वारा दबाव अब भी बना हुआ है। जो अधिकारी राज्य कर्मचारियों के साथ SIR प्रक्रिया में अनुचित संबंध बनाएंगे, उनका रास्ता आसान नहीं होगा। यह भाजपा दिखा देगी।”
भाजपा का रुख और तृणमूल का आरोप
चुनाव आयोग ने विभिन्न केंद्रीय और राज्य संस्थाओं के अधिकारियों को SIR प्रक्रिया में ऑब्जर्वर के रूप में नियुक्त किया था। शुरुआत में बंगाल भाजपा ने इस फैसले का समर्थन किया और माना कि अधिकारी निष्पक्ष रूप से काम करेंगे। हालांकि अब भाजपा का आरोप है कि कुछ केंद्रीय अधिकारी तृणमूल से जुड़े कार्यों में शामिल हो रहे हैं।
तृणमूल के मीडिया प्रमुख अरूप चक्रवर्ती ने कहा, “भाजपा नेता हमेशा केंद्रीय बलों और अधिकारियों के पक्ष में बोलते हैं। पहले वे राज्य अधिकारियों पर सवाल उठाते थे, अब केंद्रीय अधिकारियों पर भी भरोसा नहीं कर पा रहे हैं। यह चुनावी हार की निराशा का संकेत है।”
माकपा की केंद्रीय कमिटी के सदस्य सुजन चक्रवर्ती ने कहा, “केंद्रीय अधिकारी बनाम राज्य अधिकारी कोई मुद्दा नहीं है। असली सवाल यह है कि आम लोग क्यों परेशान हुए। मुर्शिदाबाद जिले में जहां अनमैप्ड संख्या कम थी, वहां लॉजिकल डिस्क्रिपेंसी सबसे ज्यादा कैसे हुई?”
फॉर्म-7 विवाद और SIR प्रक्रिया
शमीक भट्टाचार्य ने आरोप लगाया कि भाजपा के ब्लॉक स्तर के नाम का उपयोग करके फॉर्म-7 भरे जा रहे हैं। समाज के वरिष्ठ लोगों पर बिना वजह आरोप लगाए जा रहे हैं। उनके अनुसार, इन लोगों को सुनवाई के लिए बुलाया गया, जबकि इन मामलों का भाजपा से कोई संबंध नहीं है।
वहीं तृणमूल के अरूप चक्रवर्ती का कहना है कि भाजपा नेता हजारों फॉर्म-7 मामलों में लोगों को फंसाने और परेशान करने में शामिल हैं। उनका कहना है कि इस प्रक्रिया के पीछे भाजपा की भूमिका है।
SIR प्रक्रियाः केंद्रीय अधिकारियों की भूमिका पर भी सवाल
SIR प्रक्रिया में केंद्रीय और राज्य अधिकारियों के बीच संबंधों को लेकर राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप जारी हैं। आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि केंद्रीय अधिकारी निष्पक्ष रूप से समीक्षा प्रक्रिया को अंजाम दे पाएंगे या नहीं। इस विवाद ने SIR प्रक्रिया की निष्पक्षता और राजनीतिक हस्तक्षेप को लेकर चर्चा तेज कर दी है। भाजपा और तृणमूल दोनों ही इस मामले में अपनी-अपनी बयानबाजी जारी रख रहे हैं।