कोलकाताः राज्य में चुनाव नजदीक आते ही राजनीतिक माहौल गर्म होने लगा है। रैलियों और सभाओं के साथ-साथ अब सोशल मीडिया भी प्रचार का बड़ा माध्यम बन चुका है। इसी के साथ फर्जी वीडियो (फेक वीडियो) और कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) से बनाए गए ‘डीपफेक’ वीडियो के जरिए मतदाताओं को प्रभावित करने की कोशिशें भी बढ़ी हैं।
ऐसे मामलों पर अब प्रशासन ने सख्ती दिखाने का फैसला किया है। किसी भी राजनीतिक दल या व्यक्ति की शिकायत मिलने पर सीधे चुनाव आयोग (Election Commission of India) के निर्देश पर एफआईआर दर्ज की जाएगी।
नई व्यवस्था के तहत अब इस तरह के मामलों में सीधे भवानी भवन (Bhabani Bhawan) स्थित सीआईडी के साइबर क्राइम थाने में केस दर्ज होगा। जरूरत पड़ने पर अधिकारी खुद भी मामला दर्ज कर जांच शुरू कर सकते हैं। पहले ऐसे मामलों की एफआईआर संबंधित जिले के थाने में होती थी और वहां से रिपोर्ट चुनाव आयोग को भेजी जाती थी। हालांकि अब तेज कार्रवाई के लिए प्रक्रिया बदल दी गई है।
डिजिटल फोरेंसिक टीम की अहम भूमिका
इन मामलों की जांच डिजिटल फोरेंसिक विशेषज्ञों की मदद से की जाएगी। वीडियो के मूल स्रोत, आईपी एड्रेस, अपलोड करने वाले व्यक्ति की जानकारी और सोशल मीडिया कंपनियों से जुड़े तकनीकी विवरण जुटाए जाएंगे। मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच राज्य साइबर क्राइम विंग को भी सौंपी जा सकती है।
राज्य पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि चुनाव से पहले फर्जी या तोड़-मरोड़ कर बनाए गए वीडियो सिर्फ राजनीतिक विवाद नहीं, बल्कि कानून-व्यवस्था के लिए भी खतरा बन सकते हैं। इसलिए चुनाव आयोग का निर्देश मिलते ही तुरंत कार्रवाई की जाएगी।
चुनावों में ऐसे वीडियो को रोकने की पहल
पिछले लोकसभा चुनाव से पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Narendra Modi) और पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी (Mamata Banerjee) से जुड़े कई कथित फर्जी वीडियो सामने आए थे। उस समय राजनीतिक दलों के बीच तीखी बयानबाजी भी हुई थी।
हालांकि अभी बंगाल में विधानसभा चुनाव (West Bengal Assembly Election 2026) की आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है, लेकिन आरोप लगने लगे हैं कि नेताओं के पुराने बयानों को काट-छांट कर नए संदर्भ में पेश किया जा रहा है। एआई तकनीक की मदद से ऐसे वीडियो बनाए जा रहे हैं जो देखने में असली लगते हैं, लेकिन असल में भ्रामक होते हैं। सोशल मीडिया पर ये वीडियो तेजी से वायरल हो रहे हैं और मतदाताओं के बीच भ्रम फैला रहे हैं।
गलत प्रचार बर्दाश्त नहीं करेगा आयोग
चुनाव आयोग ने साफ कर दिया है कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के नाम पर फर्जी सूचना या तकनीक के जरिए गलत प्रचार को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। यदि किसी शिकायत में सच्चाई पाई जाती है, तो पुलिस को तुरंत कार्रवाई करनी होगी।
सत्ता पक्ष और विपक्ष-दोनों ही निष्पक्ष चुनाव की बात कर रहे हैं। ऐसे में आयोग की यह नई व्यवस्था चुनाव प्रक्रिया को पारदर्शी और शांतिपूर्ण बनाए रखने की दिशा में अहम कदम मानी जा रही है।