राज्य में विधानसभा चुनाव का बिगुल लगभग बज चुका है। ऐसे महत्वपूर्ण समय में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Narendra Modi) ने पश्चिम बंगाल के निवासियों को खुला पत्र लिखा है। पत्र की शुरुआत उन्होंने 'जय मां काली' के जयकारे के साथ किया है। पत्र के शुरुआत में ही उन्होंने लिखा है, 'मेरे सोने के बंगाल (सोनार बांग्ला) के युवा और वृद्ध आज वंचना का शिकार हो रहे हैं। इसलिए दिल से मैंने एक ही संकल्प लिया है, पश्चिम बंगाल को विकसित और समृद्ध बनाने का संकल्प।'
चुनाव से पहले भाजपा राज्य में 'परिवर्तन यात्रा' निकालने वाली है। कोलकाता में बड़े पैमाने पर जनसंयोग करने की योजना बनायी गयी है। इस सभा के मुख्य वक्ता प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी हो सकते हैं। इस बीच राज्य का केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह कई बार चक्कर भी लगा चुके हैं। चुनाव की घोषणा के बाद से ही भाजपा के राष्ट्रीय नेतृत्व के नेताओं का राज्य में आवाजाही शुरू हो चुकी है। ऐसी परिस्थिति में राज्य के निवासियों के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने खुला पत्र लिखा है।
पत्र में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लिखा है कि देश में पिछले 11 सालों से उनकी सरकार युवाओं से लेकर किसान, महिलाओं के विकास का काम किया जा रहा है। बंगाल में तृणमूल सरकार की 'असहयोगिता' और बैर के बावजूद पश्चिम बंगाल के 5 करोड़ लोगों को केंद्रीय जन-धन योजना के माध्यम से बैंकिंग सेवाएं मिल रही है। 'स्वच्छ भारत अभियान' के तहत 85 लाख शौचालयों का निर्माण किया गया है। 'अटल पेंशन योजना' से लेकर 'उज्जवला योजना', 'आयुष्मान भारत' से 'कृषक सम्मान निधि' का उल्लेख भी उन्होंने किया।
पीएम मोदी ने लिखा है कि स्वतंत्रता के बाद बंगाल देश की अर्थव्यवस्था का मार्गदर्शक रहा है, शिल्पायन का अग्रदूत था। आज पश्चिम बंगाल की बीमार और जीर्ण-शीर्ण दशा को देखकर हृदय व्यथित होता है। इसके लिए उन्होंने तृणमूल के 'अपशासन', 'तुष्टिकरण की राजनीति' को जिम्मेदार ठहराया है।
नरेंद्र मोदी ने आरोप लगाते हुए कहा कि स्वामी विवेकानंद, ऋषि अरविंद के पश्चिम बंगाल को वोटवैंक की संकीर्ण राजनीति, हिंसा और अराजकता से तृणमूल ने घेर कर रखा है। पत्र के अंत में उन्होंने आह्वान करते हुए कहा, 'इस बार परिवर्तन अपरिहार्य है। बंगाल की संस्कृति फिर से अपना गौरव वापस प्राप्त करेगी। धार्मिक हिंसा के शिकार हमारे शरणार्थी भाई-बहन CAA के माध्यम से नागरिकता प्राप्त करेंगे। पश्चिम बंगाल में घुसपैठ मुक्त सुशासन स्थापित होगा। साल 2026 में विकसित पश्चिम बंगाल के गठन का हम शपथ लेते हैं।'