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तृणमूल छोड़कर भाजपा में गए दीपेन्दु विश्वास की विधानसभा चुनाव से पहले 'घर वापसी', तृणमूल में लौटकर क्या कहा?

वर्ष 2016 में भाजपा के शमिक भट्टाचार्य को हराकर दीपेन्दु विश्वास विधायक बने। हालांकि साल 2021 के चुनाव में टिकट न मिलने से नाराज होकर तृणमूल छोड़कर भाजपा में शामिल हो गए थे।

By Sayani Jowardar, Posted By : Moumita Bhattacharya

Feb 22, 2026 17:37 IST

तृणमूल छोड़कर भाजपा में शामिल हुए दीपेंदु विश्वास की 'घर वापसी' हुई। पूर्व फुटबॉल खिलाड़ी दीपेंदु विश्वास एक बार फिर से तृणमूल कांग्रेस में वापस लौट आए हैं। बसीरहाट के पूर्व विधायक दीपेंदु विश्वास वर्ष 2021 में चुनाव से पहले तृणमूल छोड़कर भाजपा का दामन थाम लिया था लेकिन फिर से चुनाव से पहले ही वह पुरानी पार्टी में लौट आए हैं। रविवार को बसीरहाट से ही वह तृणमूल में शामिल हुए।

पुरानी पार्टी में वापसी के बाद उन्होंने मीडिया से बात करते हुए कहा कि पार्टी जो जिम्मेदारी सौंपेगी, उसे निभाएंगे। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि भाजपा में शामिल होने का उनका फैसला गलत था।

रविवार को बसीरहाट के तृणमूल ऑफिस में वह पार्टी में शामिल हुए। उन्होंने कहा कि पिछले 4 सालों के दौरान राज्य के विभिन्न इलाकों में आयोजित कार्यक्रमों में जब भी उन्हें बुलाया गया है, वह उपस्थित होने की कोशिश करते रहे हैं। गलती तो हो ही सकती है। मैं बसीरहाट का भूमिपुत्र हूं। यहीं से फुटबॉल खेलकर दीपेंदु विश्वास बना। विकास के साथ कदमताल मिलाते हुए आगे बढ़ना चाहता हूं।

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तृणमूल के साथ अपने पुराने रिश्तों की याद दिलाते हुए दीपेंदु विश्वास ने कहा कि साल 2014 के चुनाव में हारने के बावजूद वर्ष 2016 के चुनाव में मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने उन्हें ही उम्मीदवार बनाया था। वर्ष 2016 में भाजपा के शमिक भट्टाचार्य को हराकर वह विधायक बने। हालांकि साल 2021 में जब तृणमूल ने विधानसभा चुनाव के लिए उम्मीदवारों की घोषणा की तब टिकट नहीं मिलने से नाराज कई नेताओं ने पार्टी छोड़ दिया था। पार्टी छोड़ने वाले नेताओं की लिस्ट में दीपेन्दु विश्वास का भी नाम शामिल था।

उस वक्त तृणमूल से अलग होकर दीपेन्दु ने कहा था कि पार्टी के लिए काफी मेहनत की थी। बसीरहाट में कोई विरोधी नहीं है। मेरे पिता बसीरहाट में रहते हैं। वहां से लगातार 5 साल लोगों की सेवा की है। इसलिए मुझे टिकट क्यों नहीं दी जा रही है, यह मुझे बताया जा सकता था। मेरे साथ पार्टी के रिश्ते भी अच्छे थे।

इसके बाद भाजपा के तत्कालीन प्रदेश अध्यक्ष दिलीप घोष, शुभेंदु अधिकारी, मुकूल राय, लॉकेट चटर्जी की उपस्थिति में उन्होंने भाजपा का झंडा थाम लिया था। हालांकि उस पार्टी में दीपेंदु विश्वास का मन ज्यादा दिन नहीं लगा। राज्य कमेटी में पद छोड़ने के बाद से ही भाजपा के साथ उनकी दूरी बढ़ने लगी थी।

क्या अब एक बार फिर से टिकट मिलने की उम्मीद में ही दिपेन्दु विश्वास की तृणमूल में घर वापसी हुई है? इस सवाल का जवाब देते हुए उन्होंने कहा कि पार्टी जो जिम्मेदारी सौंपेगी, उसका पालन करना ही पड़ेगा और वह ऐसा ही करेंगे।

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