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मतदाता सूची पर सियासी संग्राम, ममता बनर्जी ने चुनाव आयोग को घेरा

सुप्रीम कोर्ट के निर्देश की अवहेलना का आरोप, आयोग का पलटवार - ‘जिलों से पूरी जानकारी नहीं मिली’।

By सुप्रकाश मंडल, Posted by: श्वेता सिंह

Feb 18, 2026 13:19 IST

कोलकाताः पश्चिम बंगाल में स्पेशल इंंटेन्सिव रिविजन (SIR) को लेकर राज्य सरकार और चुनाव आयोग के बीच टकराव और तेज हो गया है। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने आरोप लगाया है कि 14 फरवरी को सुप्रीम कोर्ट द्वारा तय समयसीमा के बावजूद दोपहर तीन बजे के बाद आयोग ने दस्तावेज अपलोड करने की अनुमति नहीं दी, जिससे लाखों मतदाताओं के कागजात जमा नहीं हो सके।

नवान्न में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में ममता ने कहा कि इलेक्टोरल रजिस्ट्रेशन ऑफिसर्स (ERO) को आयोग के पोर्टल पर लॉग-इन की अनुमति नहीं दी गई। उनके मुताबिक, इससे “लाखों मतदाताओं” के दस्तावेज जमा नहीं हो पाए। यदि उनके नाम अंतिम सूची में शामिल नहीं होते हैं तो इसकी जिम्मेदारी आयोग को लेनी होगी। उन्होंने चुनाव आयोग को ‘कैप्चर आयोग’ तक कह दिया और चेतावनी दी कि वह इस मुद्दे को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उठाएंगी।

सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर सियासत

मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने कहा कि Supreme Court ने 14 फरवरी तक सुनवाई की अनुमति दी थी, लेकिन उसी दिन दोपहर तीन बजे के बाद दस्तावेज जमा करने की प्रक्रिया रोक दी गई। इसे उन्होंने अदालत के निर्देशों की अवहेलना बताया।

ममता ने सवाल उठाया कि जब बिहार में मतदाता वैधता के लिए सरकारी ‘फैमिली रजिस्टर’ को मान्यता दी गई थी, तो पश्चिम बंगाल में उसी दस्तावेज को क्यों स्वीकार नहीं किया जा रहा। उनके अनुसार इस संबंध में आधिकारिक आदेश की प्रति राज्य सरकार के पास मौजूद है।

चुनाव आयोग का जवाब: जिलों ने पूरी सूची नहीं भेजी

आरोपों पर प्रतिक्रिया देते हुए चुनाव आयोग के तहत राज्य के मुख्य चुनाव अधिकारी मनोज अग्रवाल ने कहा कि आयोग को 1,14,772 मतदाताओं की सूची भेजी गई थी। इनके दस्तावेज अपलोड न हो पाने का दावा किया गया है।

उन्होंने बताया कि सोमवार को सभी जिलाधिकारियों को पत्र भेजकर निर्देश दिया गया था कि आयोग द्वारा मान्य 13 प्रकार के दस्तावेज रखने वाले जिन मतदाताओं के कागज जमा नहीं हो पाए, उनकी सूची मंगलवार सुबह 10 बजे तक भेजी जाए। निर्धारित समय तक केवल हावड़ा और दक्षिण 24 परगना जिलों से करीब 10,000 नामों की सूची प्राप्त हुई। अन्य जिलों से कोई जानकारी नहीं मिली।

आयोग का कहना है कि किस स्तर पर दस्तावेज अपलोड नहीं हो सके, इसकी स्पष्ट जानकारी जिलों से नहीं आई है।

नवान्न से सियासी संदेश

नबान्न में आयोजित प्रेस वार्ता के दौरान ममता ने आरोप लगाया कि आयोग भाजपा के पक्ष में काम कर रहा है। उन्होंने हरियाणा और महाराष्ट्र का भी उल्लेख करते हुए कहा कि वहां भी इसी तरह की प्रक्रियाओं पर सवाल उठे थे। मुख्यमंत्री के मुताबिक, “हम देश से प्रेम करते हैं, लेकिन इस तरह का व्यवहार स्वीकार नहीं किया जा सकता।”

टकराव गहराया, नजरें अंतिम सूची पर

मतदाता सूची संशोधन को लेकर जारी यह विवाद चुनावी माहौल को और गरमा सकता है। एक ओर राज्य सरकार प्रक्रिया की पारदर्शिता और समान मानकों की मांग कर रही है। दूसरी ओर आयोग प्रशासनिक स्तर पर पूरी जानकारी न मिलने की बात कह रहा है।

अब सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि अंतिम मतदाता सूची में कितने नाम शामिल होते हैं और क्या इस मुद्दे पर कानूनी या राजनीतिक लड़ाई आगे और तेज होती है।

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