कोलकाताः चुनाव आयोग (ECI) ने पश्चिम बंगाल में 2026 के विधानसभा चुनाव को लेकर अपनी तैयारियां तेज कर दी हैं। राज्य विधानसभा का कार्यकाल 7 मई 2026 को समाप्त हो रहा है। ऐसे में अप्रैल-मई के बीच चुनाव कराए जाने की संभावना है। पिछले चुनावों में हुई हिंसक घटनाओं और हालिया मतदाता सूची विवादों को देखते हुए आयोग इस बार किसी भी तरह की ढिलाई के मूड में नहीं है।
एसआईआर प्रक्रिया से उठे सवाल, आयोग ने दिखाया कड़ा रुख
स्पेशल इंटेंसिव रिविजन (SIR) प्रक्रिया 4 नवंबर 2025 से शुरू हुई थी और 16 दिसंबर 2025 को ड्राफ्ट मतदाता सूची जारी की गई। इस दौरान लगभग 58.2 लाख नाम हटाए गए जो कुल मतदाताओं का 7.6% है। हटाए गए नामों में मुख्य रूप से फर्जी और डुप्लिकेट प्रविष्टियां शामिल बताई गईं।
दस्तावेज सत्यापन 7 फरवरी 2026 तक चला लेकिन प्रक्रिया में देरी के कारण अब अंतिम मतदाता सूची 28 फरवरी 2026 को प्रकाशित की जाएगी। राज्य के मुख्य चुनाव अधिकारी मनोज अग्रवाल ने एक सप्ताह का अतिरिक्त समय मांगा था। हालांकि, इलेक्टोरल रोल माइक्रो ऑब्जर्वर (ईआरएमओ) की तैनाती 28 फरवरी तक बढ़ा दी गई है।
अनियमितताओं के आरोपों के बाद आयोग ने सात अधिकारियों को निलंबित किया और पांच चुनाव अधिकारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने का आदेश दिया। ये मामले डेटा सुरक्षा उल्लंघनों से जुड़े हैं।
सियासी बयानबाजी तेज
मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने एसआईआर प्रक्रिया को केंद्र की साजिश बताया है और आरोप लगाया है कि बंगालियों को मताधिकार से वंचित करने की कोशिश हो रही है।
वहीं, भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने टीएमसी विधायकों पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाते हुए ‘चार्जशीट’ जारी की है।
यदि अंतिम सूची में और देरी होती है, तो चुनाव कार्यक्रम की घोषणा प्रभावित हो सकती है, जिससे सियासी तनाव और बढ़ सकता है।
सुरक्षा पर फोकस: केंद्रीय बलों की रिकॉर्ड तैनाती की तैयारी
2021 विधानसभा और 2024 लोकसभा चुनावों में हिंसा की घटनाओं को देखते हुए आयोग इस बार केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल की पहले से तैनाती की रणनीति पर काम कर रहा है। सूत्रों के अनुसार, मार्च के पहले सप्ताह में कम से कम 100 कंपनियां तैनात की जा सकती हैं।
यदि चुनाव दो या तीन चरणों में कराए जाते हैं, तो लगभग 2,000 कंपनियों- यानी करीब 2.4 लाख जवानों की जरूरत पड़ सकती है, जो 2021 की तुलना में लगभग दोगुनी है।
ECI की फुल बेंच 1-2 मार्च को राज्य का दौरा करेगी। इस दौरान संवेदनशील और अतिसंवेदनशील मतदान केंद्रों की पहचान तथा सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा की जाएगी।
चुनावी कैलेंडर: मार्च में घोषणा, अप्रैल-मई में मतदान संभव
28 फरवरी को अंतिम मतदाता सूची प्रकाशित होने के बाद चुनाव कार्यक्रम की घोषणा मार्च के दूसरे सप्ताह में संभव है। 13 फरवरी को आयोग ने वर्चुअल बैठक में दस्तावेज सत्यापन और अस्थायी मतदान केंद्रों पर चर्चा की थी।
संभावना है कि चुनाव अन्य राज्यों - तमिलनाडु, केरल, असम और पुडुचेरी के साथ समन्वय में आयोजित किए जाएं।
यदि मतदान कम चरणों में होता है, तो मतदान प्रतिशत बढ़ सकता है, लेकिन सुरक्षा चुनौती और भी गंभीर होगी। वहीं अधिक चरणों का मतलब लंबा चुनावी अभियान और बढ़ता राजनीतिक ध्रुवीकरण भी हो सकता है।
आयोग पर निष्पक्ष चुनाव कराने की चुनौती
पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 न केवल राजनीतिक दलों बल्कि भारत निर्वाचन आयोग के लिए भी बड़ी परीक्षा साबित होंगे। मतदाता सूची की शुद्धता, केंद्रीय बलों की व्यापक तैनाती और पारदर्शी प्रक्रिया - ये तीनों कारक चुनाव की विश्वसनीयता तय करेंगे।
आयोग को डिजिटल निगरानी और पारदर्शिता को और मजबूत करना होगा। वहीं राज्य सरकार का सहयोग भी उतना ही आवश्यक है। शांतिपूर्ण और निष्पक्ष चुनाव ही बंगाल की लोकतांत्रिक साख को मजबूत करेंगे।