होली का त्योहार रंगों, उमंग और मेल-मिलाप का पर्व है। इस दिन घरों में पकवानों की खुशबू के साथ जिस पेय का सबसे अधिक इंतजार रहता है वह है पारंपरिक ठंडाई। मेवों, बीजों और सुगंधित मसालों से तैयार यह शीतल पेय न केवल स्वाद में लाजवाब होता है बल्कि बदलते मौसम में शरीर को संतुलित रखने में भी अहम भूमिका निभाता है।
‘ठंड’ शब्द से बना ‘ठंडाई’ नाम ही इसके गुणों को दर्शाता है। होली के समय सर्दी विदा ले रही होती है और गर्मी दस्तक दे रही होती है। ऐसे में ठंडाई शरीर को भीतर से संतुलित करती है। इसमें डाली जाने वाली काली मिर्च हल्की ठंड से बचाव में सहायक होती है जबकि सौंफ, खसखस, तरबूज के बीज और गुलकंद शरीर को ठंडक प्रदान करते हैं। केसर और इलायची इसकी सुगंध बढ़ाते हैं वहीं बादाम, काजू और पिस्ता इसे पौष्टिक बनाते हैं।
ठंडाई केवल स्वाद ही नहीं, सेहत का भी खजाना है। यह ऊर्जा प्रदान करती है, पाचन क्रिया को बेहतर बनाती है और रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में मदद करती है। यही कारण है कि होली की दावत में यह विशेष स्थान रखती है।
इसे बनाना भी अपेक्षाकृत आसान है। बादाम, पिस्ता और अन्य मेवों को 6 से 8 घंटे या रात भर भिगोकर उनका छिलका हटाया जाता है। फिर इन्हें काजू, खसखस, सौंफ, इलायची, काली मिर्च और गुलकंद के साथ पीसकर महीन पेस्ट तैयार किया जाता है। इस पेस्ट को उबाले हुए दूध और चीनी में मिलाकर ठंडा किया जाता है। परोसने से पहले छानकर गुलाब की पंखुड़ियों और केसर से सजाया जाता है।
यदि होली की पार्टी के लिए पहले से तैयारी करनी हो, तो ठंडाई का सिरप बनाकर भी रखा जा सकता है। चीनी, केसर और पानी को पकाकर उसमें तैयार पेस्ट मिलाया जाता है और गाढ़ा होने तक उबाला जाता है। ठंडा होने पर इसे कांच के एयरटाइट जार में भरकर 3-4 महीने तक फ्रिज में सुरक्षित रखा जा सकता है। जरूरत पड़ने पर 2-3 चम्मच सिरप ठंडे दूध में मिलाते ही तुरंत ठंडाई तैयार हो जाती है।
विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि बेहतरीन स्वाद के लिए अच्छी गुणवत्ता वाले मेवे और मसालों का उपयोग करें। परोसने से पहले कुछ घंटों तक फ्रिज में ठंडा करने से इसका स्वाद और ताजगी और बढ़ जाती है।
रंगों की मस्ती के बीच, घर की बनी ठंडाई होली के जश्न को और भी यादगार बना देती है।