अयोध्या (उत्तर प्रदेश): अयोध्या में बने भव्य श्रीराम जन्मभूमि मंदिर के निर्माण में इस्तेमाल हुई कटर मशीनों और अन्य उपकरणों को अब सुरक्षित रखा जाएगा। ये कटर मशीनें 1993-94 में रामघाट कार्यशाला में लगाई गई थीं। अब ये मशीनें उपकरण नहीं रह गयी हैं, बल्कि इतिहास की धरोहर बनने जा रही हैं। ये मंदिर की निर्माण गाथा से जुड़ गयी हैं।
श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के समन्वयक शरद शर्मा ने बताया कि इन ऐतिहासिक मशीनों को मंदिर परिसर में एक विशेष तकनीकी गैलरी या स्मारक में रखा जाएगा ताकि आने वाली पीढ़ियां यह देख सकें कि इतने विशाल और दिव्य मंदिर का निर्माण किस तकनीकी प्रक्रिया से हुआ। मंदिर परिसर का निर्माण कार्य समाप्त होते ही इन मशीनों को सुरक्षित रखने की प्रक्रिया सम्पन्न सम्पन्न होगी।
इससे सम्बंधित कार्यशाला सितंबर 1990 में शुरू हुई थी। उस समय से लेकर अब तक जिन मशीनों मंदिर के निर्माण में योगदान दिया, उन्हें संभालकर रखने की योजना है।
तकनीकी गैलरी में दिखेंगी ऐतिहासिक कटर मशीनें
शर्मा ने बताया कि रामघाट कार्यशाला की स्थापना 1998 में हुई थी। इन मशीनों की कीमत उस समय 25 से 30 लाख रुपये थी। मंदिर निर्माण के लिए दो प्रमुख कार्यशालाएं बनाई गई थीं। कार्यशाला की शुरुआत में सितंबर 1990 में हुई थी। उस समय दो शिल्पकारों ने पत्थरों की नक्काशी का काम शुरू किया था। उसके बाद तो रामघाट और रामसेवक पुरम की कार्यशालाओं में हथौड़े और छेनी की आवाजें लगातार सुनी जा सकती थीं। हालांकि पत्थरों की कटाई और नक्काशी का काम पहले ही शुरू हो चुका थी। बाद में बड़े पत्थरों को सही आकार देने के लिए कटर मशीन लगाने का निर्णय लिया गया। इन मशीनों से करीब एक लाख घन फुट पत्थर काटे गए। इन पत्थरों पर बाद में महीन नक्काशी की गई और उन्हें मंदिर के निर्माण में लगाया गया।
संतों के मार्गदर्शन में शुरू हुआ निर्माण
श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के अध्यक्ष नृत्य गोपाल दास महाराज के मार्गदर्शन में पूरे मंदिर निर्माण का कार्य प्रारंभ हुआ था।