लगातार तापमान में वृद्धि और तेज धूप के कारण त्वचा की सुरक्षा अत्यंत आवश्यक हो गई है। सूर्य से निकलने वाली पराबैंगनी किरणें त्वचा को भीतर तक प्रभावित करती हैं। इनके दुष्प्रभाव से बचाव के लिए सनस्क्रीन एक प्रभावी साधन है। यह केवल गर्मियों में ही नहीं, बल्कि सर्दियों और वर्षा ऋतु में भी उपयोगी होती है। नियमित प्रयोग से त्वचा को झुलसने, कालापन आने और समय से पहले झुर्रियां पड़ने जैसी समस्याओं से बचाया जा सकता है।
सनस्क्रीन क्या है और क्यों आवश्यक है
सनस्क्रीन एक विशेष प्रकार की क्रीम, लोशन या स्प्रे होती है, जिसमें ऐसे तत्व पाए जाते हैं जो हानिकारक किरणों को त्वचा तक पहुंचने से रोकते हैं। इसके प्रयोग से पिगमेंटेशन, सनबर्न और त्वचा कैंसर जैसी गंभीर समस्याओं का जोखिम कम होता है। विशेषज्ञों के अनुसार घर से बाहर निकलने वाले प्रत्येक व्यक्ति को इसका उपयोग करना चाहिए, चाहे धूप हल्की ही क्यों न हो।
सही एसपीएफ का चयन
सनस्क्रीन खरीदते समय एसपीएफ (सन प्रोटेक्शन फैक्टर) अवश्य देखना चाहिए। सामान्य दैनिक कार्यों के लिए एसपीएफ 15 से 30 पर्याप्त माना जाता है। यदि धूप में अधिक समय बिताना हो तो एसपीएफ 30 से 50 बेहतर रहता है। लंबे समय तक खुले वातावरण में रहने वालों तथा संवेदनशील त्वचा वाले लोगों के लिए एसपीएफ 50 या उससे अधिक उपयुक्त है। केवल अधिक एसपीएफ चुनना ही पर्याप्त नहीं, बल्कि त्वचा के प्रकार के अनुसार उत्पाद का चयन भी आवश्यक है।
लगाने का सही तरीका
सनस्क्रीन का प्रभाव तभी मिलता है जब इसे सही क्रम में लगाया जाए। सबसे पहले चेहरे को साफ कर टोनर और मॉइस्चराइजर लगाएं, उसके बाद सनस्क्रीन का प्रयोग करें। बाहर जाने से लगभग 20 मिनट पूर्व इसे लगाना चाहिए ताकि यह त्वचा में अच्छी तरह समा जाए। साथ ही हर दो से तीन घंटे के अंतराल पर दोबारा लगाना लाभकारी होता है, विशेषकर अधिक पसीना आने या धूप में रहने की स्थिति में।
निष्कर्ष
स्वस्थ और सुरक्षित त्वचा के लिए सनस्क्रीन का नियमित और सही उपयोग अत्यंत महत्वपूर्ण है। उचित चयन और सावधानीपूर्वक प्रयोग से धूप और धुल कणों के दुष्प्रभावों से सुरक्षा प्राप्त की जा सकती है।