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10 हजार गंवाकर मिला 3 लाख से ज्यादा का मुआवजा

9 साल तक 10,000 रुपये के लिए लड़ाई, आखिर में मिले 3 लाख से अधिक

सूरत: एटीएम (ATM) में पिन डालने के बाद भी कैश नहीं निकलता लेकिन खाते से पैसे कट जाने का मैसेज आ जाता है ऐसी समस्या का सामना कई ग्राहकों को करना पड़ता है। आमतौर पर ऐसे मामलों में 5 दिनों के भीतर बैंक पैसा वापस कर देता है लेकिन अगर ऐसा न हो तो क्या होता है इसका दर्द पिछले 9 साल में गुजरात के सूरत के एक ग्राहक ने झेला। हालांकि अंत भला तो सब भला! सूरत के इस ग्राहक ने 9 साल तक 10,000 रुपये के लिए लड़ाई लड़ी और आखिरकार 3 लाख रुपये से ज्यादा हासिल किए।

18 फरवरी 2017 को सूरत के उधना इलाके के एक एसबीआई एटीएम (SBI ATM) से 10,000 रुपये निकालने की कोशिश की थी ‘बैंक ऑफ बड़ौदा’ के इस ग्राहक ने। उनका दावा है कि उन्होंने एटीएम कार्ड डालकर पिन डाला लेकिन मशीन से पैसे नहीं निकले और न ही कोई रसीद मिली। कुछ ही क्षण बाद उन्हें मैसेज मिला कि उनके ‘बैंक ऑफ बड़ौदा’ खाते से 10,000 रुपये डेबिट हो गए हैं। ग्राहक को लगा कि बैंक पैसा वापस कर देगा लेकिन 3 दिन बाद भी ऐसा नहीं हुआ।

इसके बाद 21 फरवरी 2017 को उन्होंने ‘बैंक ऑफ बड़ौदा’ की डंभल शाखा में लिखित शिकायत दर्ज कराई। मार्च से मई के बीच कई ईमेल भी भेजे लेकिन संतोषजनक जवाब नहीं मिला। उन्होंने आरबीआई से भी संपर्क किया लेकिन वहां से भी कोई मदद नहीं मिली। एसबीआई के एटीएम की सीसीटीवी फुटेज पाने के लिए ‘सूचना का अधिकार’ के तहत आवेदन किया लेकिन वह भी नहीं मिला। अंततः 20 दिसंबर 2017 को ग्राहक को कंज्यूमर फोरम का दरवाजा खटखटाना पड़ा।

सुनवाई के दौरान ‘बैंक ऑफ बड़ौदा’ ने कहा कि उनके रिकॉर्ड में ट्रांजैक्शन सफल दिख रहा है और चूंकि एटीएम एसबीआई का था इसलिए जवाबदेही उनकी बनती है लेकिन कंज्यूमर आयोग ने यह तर्क नहीं माना। आयोग ने सवाल उठाया कि जब बैंक ट्रांजैक्शन का सबूत नहीं दे पाया तो पैसे वापस क्यों नहीं किए गए?

फोरम ने आदेश दिया कि 10,000 रुपये 9% वार्षिक ब्याज के साथ लौटाए जाएं और देरी के लिए हर दिन 100 रुपये का मुआवजा दिया जाए। 26 फरवरी 2026 तक कुल 3,288 दिन होने पर मुआवजा 3,28,800 रुपये हो गया। इसके अलावा मानसिक परेशानी के लिए 3,000 रुपये और कानूनी खर्च के लिए 2,000 रुपये भी ‘बैंक ऑफ बड़ौदा’ को देने होंगे।

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