रांची : झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने सरहुल पर्व के मौके पर लोगों को प्रकृति बचाने का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि प्रकृति की रक्षा करना ही सबसे बड़ी पूजा है।
शनिवार को रांची के करम टोली स्थित ट्राइबल कॉलेज हॉस्टल में कार्यक्रम आयोजित हुआ। इसमें मुख्यमंत्री अपनी पत्नी और विधायक कल्पना सोरेन के साथ शामिल हुए। उन्होंने पारंपरिक रीति-रिवाजों में हिस्सा लिया। साथ ही जनजातीय वाद्य यंत्र ‘मंदर’ भी बजाया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि इंसान और प्रकृति का रिश्ता बहुत गहरा है। हर जीव का जन्म प्रकृति से होता है। अंत में हर कोई उसी में मिल जाता है। उन्होंने कहा कि अगर प्रकृति नहीं रहेगी, तो जीवन भी नहीं बचेगा।
उन्होंने लोगों से अपील की कि वे प्रकृति का सम्मान करें। पेड़-पौधों और जल स्रोतों की रक्षा करें। उन्होंने कहा कि जब तक प्रकृति सुरक्षित है तब तक इंसान भी सुरक्षित रहेगा।
सरहुल झारखंड का प्रमुख आदिवासी त्योहार है। यह वसंत ऋतु के आगमन पर मनाया जाता है। इस दिन लोग पारंपरिक कपड़े पहनते हैं। जगह-जगह जुलूस निकलते हैं। लोग ढोल-नगाड़ों की धुन पर नाचते और गाते हैं।
सुबह पूजा के साथ कार्यक्रम की शुरुआत होती है। इसके बाद आदिवासी पुजारी जिन्हें ‘पाहन’ कहा जाता है बारिश का अनुमान लगाते हैं। परंपरा के अनुसार साल के पेड़ के नीचे दो मिट्टी के घड़े पानी से भरकर रखे जाते हैं। अगले दिन उन्हें देखकर वर्षा का अंदाजा लगाया जाता है। इस बार सामान्य बारिश की उम्मीद जताई गई है।
मुख्यमंत्री और उनकी पत्नी ने सिरमटोली के सरना स्थल पर भी पूजा की। यहां बड़ी संख्या में लोग मौजूद थे।
इसी दिन राज्य में ईद-उल-फितर भी मनाई गई। रांची के कई ईदगाह और मस्जिदों में लोगों ने नमाज अदा की। सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए थे।
सरकार ने लोगों से शांति और भाईचारा बनाए रखने की अपील की है।