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RG Kar हादसा : पत्नी ने सुनायी रोंगटे खड़े करने वाले पलों की दास्तां, परिवार ने मांगी सरकारी नौकरी

मुक्ता बंद्योपाध्याय ने बताया कि अरुप के शरीर का ऊपरी हिस्सा लिफ्ट के बाहर और निचला अंदर ही था और उसी स्थिति में लिफ्ट घिसता हुआ ऊपर जाने लगा।

By Moumita Bhattacharya

Mar 21, 2026 19:29 IST

RG Kar मेडिकल कॉलेज व अस्पातल में लिफ्ट खराब हो गयी, उसमें फंसकर उसकी और महज 4 साल के बच्चे की आंखों के सामने ही दमदम निवासी अरुप बंद्योपाध्याय की दर्दनाक मौत हो गयी। उनकी मौत को लेकर एक ओर जहां पुलिस ने जांच और घटना के लिए दोषियों की धड़पकड़ शुरू कर दी है वहीं दूसरी ओर सरकारी अस्पताल की सुरक्षा-व्यवस्था को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं।

अरुप अपने पीछे परिवार में पत्नी मुक्ता बंद्योपाध्याय, 4 साल का बेटा और माता-पिता को छोड़कर गए हैं। अरुप के पिता की एक छोटी सी दुकान है। सवाल उठ रहा है कि अब इस परिवार का क्या होगा?

परिवार के अन्य सदस्यों व आस-पड़ोस के लोगों ने अरुप की पत्नी के लिए सरकारी नौकरी की मांग की है।

लापरवाही और आरोप का दौर

अरुप अपने 4 साल के बेटे के फ्रैक्चर का ऑपरेशन करवाने के लिए आरजी कर अस्पताल गए थे। ट्रॉमा केयर बिल्डिंग के दूसरी मंजिल पर ऑपरेशन होने वाला था लेकिन ऑपरेशन से पहले बच्चे को शौचालय ले जाते समय ही यह हादसा हुआ। जिस वक्त यह हादसा हुआ उस समय मौके पर मौजूद सुतपा बंद्योपाध्याय ने मीडिया से बात करते हुए आरोप लगाया कि मुझे अंदर से किसी बच्चे के चीखने की आवाज मिल रही थी।

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सिक्योरिटी गार्ड से पूछा कि क्या लिफ्ट खराब है तो उन्होंने बताया कि लिफ्ट ठीक है। उसी समय लिफ्ट अनियंत्रित होकर ऊपर-नीचे आने-जाने लगी। इसके बाद सिक्योरिटी गार्ड से मैंने लिफ्ट को रोकने के लिए कुछ करने को कहा। शुरुआत में ऑपरेशन थिएटर के बाहर तैनात सिक्योरिटी गार्ड कुछ करने को राजी ही नहीं हुए। उस समय लिफ्टमैन कहां थे? इस बारे में पूछने पर उक्त महिला ने बताया कि लिफ्टमैन तब सो रहे थे। वह उनके सोने का वक्त होता है। कोई लिफ्टमैन नहीं मिला था।

डॉक्टरों पर लगाए गंभीर आरोप

लिफ्ट लगातार ऊपर-नीचे करता हुए एक बार बेसमेंट में गया था। लेकिन लिफ्ट से बाहर निकलने वाले गेट के सामने ग्रील लगी है जिसपर उस समय ताला लगा था। इसलिए अरुप, उनकी पत्नी और बच्चा वहां से बाहर नहीं निकल सकें। पहली मंजिल के फर्श से आगे बढ़कर जब लिफ्ट कुछ देर के लिए रुकी तो अरुप ने अपनी पत्नी और बच्चे को बाहर निकाल दिया।

जब वह खुद बाहर निकलने लगे तो लिफ्ट का दरवाजा झटके के साथ बंद हो गया और फिर से चलने लगी। सुपता बंद्योपाध्याय का आरोप है कि उस समय वहां मौजूद लोगों से उन्होंने कई बार मदद की गुहार लगायी थी। उनका आरोप है, 'मैंने कहा था कि मेरे भाई को बचाओ। किसी ने कुछ नहीं किया। डॉक्टरों ने कहा कि यह उनकी ड्यूटी नहीं है। यहां चीख-पुकार मत मचाएं। कई मरीज और उनके परिजन हैं।'

अरुप बंद्योपाध्याय की बुआ कृष्णा बंद्योपाध्याय ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि घर का एकमात्र कमाऊ बेटा चला गया। ऐसे में परिवार की क्या हालत होगी? इसी अस्पताल में महिला चिकित्सक की हत्या कर दी गयी, उसे न्याय नहीं मिला। हमारा बेटा स्वस्थ गया था और मृत लौटा। हम चाहते हैं कि दोषियों को कठोर से कठोर सजा मिलेगा।

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बताया जाता है कि अरुप बंद्योपाध्याय की घायल पत्नी और बच्चे का इलाज एक निजी अस्पताल में चल रहा है। कृष्णा बंद्योपाध्याय ने कहा कि सरकार से हाथ जोड़कर अनुरोध कर रही हूं कि राज्य सरकार उसकी (अरुप की) पत्नी को एक स्थायी नौकरी दे। अरुप की पत्नी शिक्षित है। उसे स्थायी नौकरी दी जाए।

मदद के लिए कोई नहीं आया

मुक्ता बंद्योपाध्याय ने अपने बयान में कहा है कि लिफ्ट में जाकर जैसे ही निर्धारित फ्लोर का बटन दबाया गया तो लिफ्ट पहले तो ऊपर गयी लेकिन दरवाजा नहीं खुला। लिफ्ट बिना कोई कमांड दिए ही कई बार ऊपर-नीचे करने लगी। कभी 7वीं मंजिल तो कभी बेसमेंट में चली गयी। हम बहुत डर गए थे। इसके बाद बेसमेंट में जाकर रुक गयी। दरवाजा भी खुला लेकिन रात को बेसमेंट पूरी तरह से बंद होने की वजह से लिफ्ट से बाहर निकलने के ग्रील पर ताला लगा था।

उन्होंने आगे बताया कि बेसमेंट में पहुंचने के बाद दरवाजा एक खुला तो किसी तरह से मुझे और बेटे को उन्होंने (अरुप ने) लिफ्ट से बाहर निकाल दिया। लिफ्ट के बेसमेंट के सामने खड़े होने की थोड़ी सी जगह थी। वहीं बेटे को खड़ा किया। वहां खड़े होने की और जगह नहीं थी। अरुप तब आधे लिफ्ट के बाहर और आधे अंदर ही थे। अचानक लिफ्ट ऊपर जाने लगी। धक्का लगने की वजह से मैं और बेटा लिफ्ट के गड्डे में गिर गए। हम मदद के लिए पागलों की तरह चीखने लगे लेकिन कोई नहीं आया।

पहले शरीर पर पड़े खून के छींटे और फिर...

आगे की घटना को बयां करते हुए मुक्ता फुट-फुटकर रोने लगी। उन्होंने बताया कि अरुप के शरीर का ऊपरी हिस्सा लिफ्ट के बाहर और निचला अंदर ही था और उसी स्थिति में लिफ्ट घिसता हुआ ऊपर जाने लगा। गड्डे से किसी प्रकार मैं बेटे को बगल वाली जगह पर खड़ा कर पायी थी। पूरी ताकत के साथ चीख रही थी कि शायद मदद के लिए कोई आए। अचानक मैंने देखा कि मेरे पैरों पर खून की बूंदें टपक रही थी। वह अरुप का ही खून था।

कुछ सेकेंड के अंदर ही खून से सना अरुप का शव उनकी पत्नी की गोद में आकर गिरा। इस घटना की भयावहता से अरुप की पत्नी अभी तक बाहर नहीं निकल पायी हैं। वह बार-बार बस एक ही बात कह रही हैं - कुछ ही सेकंड में सब कुछ घट गया। डॉक्टरों का कहना है कि जब अरुप को वार्ड में लाया गया तब उनके नाक और मुंह से लगातार खून बह रही थी। उनकी जान जा चुकी थी।

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