डेढ़ सालों बाद एक बार फिर से आरजी कर मेडिकल कॉलेज व अस्पताल सवालों के घेरे में है। करीब डेढ़ साल पहले आरजी कर मेडिकल कॉलेज व अस्पताल में अपनी ड्यूटी कर रही युवा डॉक्टर काम खत्म होने के बाद घर वापस नहीं लौटी थी। उस समय भी इस सरकारी अस्पताल की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर सवाल उठाया गया था।
अब एक बार फिर से आरजी कर मेडिकल कॉलेज व अस्पताल की सुरक्षा-व्यवस्था पर उंगली उठायी जा रही है। जब एक 41 वर्षीय पिता अपने 4 साल के बेटे के इलाज के लिए अस्पताल आया लेकिन हादसे का शिकार बनकर उसकी दर्दनाक मौत हो गयी।
शुक्रवार के इस हादसे ने जहां आरजी कर अस्पताल को चर्चाओं में ला दिया है वहीं पानीहाटी के उस दंपति के घाव को भी फिर से हरा कर दिया है जिनकी बेटी की डेढ़ साल पहले अस्पताल में ड्यूटी के दौरान दुष्कर्म और हत्या कर दी गयी थी। लिफ्ट हादसे के बारे में सुनकर अभया की मां अपनी नाराजगी को दबा नहीं सकीं। उन्होंने सवाल उठाते हुए कहा कि क्या अब भी प्रबंधन को इस अस्पताल का संचालन करने का अधिकार है?
शुक्रवार की भोर में आरजी कर अस्पताल के ट्रॉमा केयर बिल्डिंग की 2 नंबर लिफ्ट में बेटे और पत्नी के साथ दमदम निवासी अरुप बंद्योपाध्याय फंस गए। दावा किया जा रहा है कि लिफ्ट का दरवाजा बंद न हो, इसे सुनिश्चित करने के लिए अरुप बंद्योपाध्याय दरवाजे के बीच में ही खड़े हो गए थे और उसी दौरान लिफ्ट ऊपर-नीचे आने-जाने लगा। लिफ्ट और दीवार के बीच फंसकर युवक की दर्दनाक मौत हो गयी।
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फूटा अभया के माता-पिता का गुस्सा
इस घटना की जानकारी जैसे ही अभया के माता-पिता को मिली, अस्पताल प्रबंधन के प्रति उनका गुस्सा फुट पड़ा। अभया की मां ने कहा, 'इसे दुर्घटना नहीं कही जाएगी। लिफ्ट में कोई लिफ्टमैन नहीं था। वे अंदर ही फंस गए थे लेकिन कोई मदद के लिए भी आगे नहीं आया।' घटना की भयावहता के बारे में उन्होंने कहा कि सबसे अधिक दुःखद बात यह है कि युवक की खून छींटे उनकी पत्नी के शरीर पर पड़ रहे थे। वह लगातार चीख रही थी। मदद की गुहार लगा रही थी लेकिन कोई बचाने के लिए आगे नहीं आया।
कैसे घटी दुर्घटना?
पारिवारिक सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार दक्षिण दमदम नगर पालिका का कर्मचारी अरुप बंद्योपाध्याय ने गुरुवार को ही अपना जन्मदिन मनाया। इस मौके पर घर पर रिश्तेदार भी आए थे। इसी दौरान खेलते हुए अरुप का 4 साल का बेटा पलंग से नीचे गिर पड़ा और उसका हाथ टूट गया। अरुप तुरंत अपने बेटे को लेकर आरजी कर अस्पताल भागे।
ट्रॉमा केयर बिल्डिंग की दूसरी मंजिल पर उनके बेटे का ऑपरेशन होने वाला था लेकिन सुबह 3.45 बजे ऑपरेशन से पहले बेटे को शौचालय ले जाने के लिए अरुप, उनकी पत्नी और बेटा लिफ्ट नंबर 2 में चढ़ा। वे चौथी मंजिल पर जाने वाले थे लेकिन वहां न जाकर बिना कोई कमांड दिए ही लिफ्ट ऊपर-नीचे करने लगा। वे बहुत डर गए।
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एक समय ऐसा भी हुआ जब लिफ्ट पहले तल के फर्श से थोड़ा ऊपर जाकर रुक गया और लिफ्ट का दरवाजा भी खुल गया। इसी मौके का फायदा उठाकर अरुप ने अपने बेटे और पत्नी को किसी तरह से लिफ्ट से बाहर निकाल दिया। लेकिन जैसे ही अरुप बाहर निकलने लगे तभी लिफ्ट का दरवाजा बंद हो गया और उनके शरीर का आधा-आधा हिस्सा लिफ्ट और दीवार के बीच फंस गया। इसके बाद लिफ्ट एक झटके में बेसमेंट की तरफ जाने लगी। इस वजह से लिफ्ट और दीवार के बीच फंसे अरुप को भयानक चोट आयी। यह चोट कितनी ज्यादा थी, इसकी व्याख्या पोस्टमार्टम रिपोर्ट में भी की गयी है।
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गलती किसकी?
शुक्रवार की इस भयानक घटना में अस्पताल के रोगी कल्याण समिति के सदस्य और तृणमूल विधायक अतिन घोष ने गलती को स्वीकार कर ली है। सुपर सप्तर्षी चट्टोपाध्याय ने भी सीधे तौर पर भले ही स्वीकार न किया हो लेकिन लापरवाही की बात उन्होंने भी मानी।
अरुप बंद्योपाध्याय की मौत के बाद परिवार की ओर से लापरवाही का आरोप लगाते हुए अस्पताल प्रबंधन और पुलिस के पास शिकायत दर्ज करवायी है। बीएनएस 105/3(5) धारा में गैर इरादतन हत्या का मामला दायर किया है। इस घटना में अब तक 5 लोगों को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है जिसमें मिलन कुमार दास, विश्वनाथ दास, मानस कुमार गुहा शामिल हैं और ये तीनों ही लिफ्टमैन हैं। इसके साथ ही सुरक्षाकर्मी असरफल रहमान और शुभदीप दास को भी गिरफ्तार किया गया है।