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₹1.44 लाख करोड़ का बिल! राजस्थान के खिलाफ कोर्ट जाएगी पंजाब सरकार, 100 साल पुराने इस समझौते ने बढ़ाई हलचल

पंजाब और राजस्थान के बीच पानी के पैसों को लेकर कानूनी जंग छिड़ गई है। पंजाब के ₹1.44 लाख करोड़ के दावे को राजस्थान ने 'गैर-कानूनी' बताकर खारिज कर दिया है। अब CM मान इस मामले को अदालत ले जाने की तैयारी में हैं।

By लखन भारती

Mar 21, 2026 13:18 IST

पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने एक बड़ा ऐलान करते हुए कहा है कि उनकी सरकार राजस्थान से पानी के बकाया ₹1.44 लाख करोड़ वसूलने के लिए अदालत का दरवाजा खटखटाएगी। मुख्यमंत्री का कहना है कि राजस्थान सालों से पंजाब का पानी इस्तेमाल कर रहा है, लेकिन उसके बदले मिलने वाली 'रॉयल्टी' (फीस) देना बंद कर दी है। मान ने दो टूक शब्दों में कहा, 'हम कोर्ट में केस लड़ेंगे और अब राजस्थान सरकार को वहीं जवाब देना होगा।'

आसान शब्दों में समझें पूरा विवाद

यह मामला आज का नहीं, बल्कि साल 1920 का है। उस समय ब्रिटिश सरकार और बीकानेर के महाराजा के बीच एक समझौता हुआ था। इसके तहत राजस्थान (बीकानेर रियासत) को पंजाब से पानी मिलना था, जिसके बदले में वह पंजाब को पैसे देता था। यह सिलसिला साल 1960 तक ठीक चला, लेकिन उसके बाद राजस्थान ने पैसे देना बंद कर दिया, जबकि पानी लेना जारी रखा।

'सिंधु जल संधि का फायदा उठाया'

मुख्यमंत्री मान ने बताया कि 1960 में जब सिंधु जल संधि (Indus Water Treaty) हुई, तो राजस्थान ने इसका फायदा उठाकर पैसे देना रोक दिया। हालांकि, पुराना 1920 वाला समझौता कभी रद्द नहीं हुआ था। आज भी राजस्थान 'फिरोजपुर फीडर' के जरिए 18,000 क्यूसेक पानी ले रहा है। पंजाब सरकार का तर्क है कि 1960 से लेकर 2026 तक का अगर हिसाब लगाया जाए, तो राजस्थान पर ₹1.44 लाख करोड़ का बकाया निकलता है।

पिछली सरकारों पर साधा निशाना

भगवंत मान ने पिछली सरकारों को भी घेरे में लिया। उन्होंने कहा कि 1920 के समझौते के मुताबिक हर 25 साल में इसकी समीक्षा होनी चाहिए थी, लेकिन पुराने मुख्यमंत्रियों ने कभी पंजाब का पक्ष मजबूती से नहीं रखा। अब पंजाब सरकार ने साफ कर दिया है कि या तो राजस्थान अपना बकाया चुकाए, या फिर पानी लेना बंद करे। इस बड़े कानूनी कदम से दोनों राज्यों के बीच सियासी पारा गरमाना तय है।

राजस्थान सरकार का पलटवार

दूसरी ओर, राजस्थान सरकार ने पंजाब के इस दावे को सिरे से खारिज करते हुए इसे 'असंवैधानिक' करार दिया है। राजस्थान के जल संसाधन मंत्री सुरेश सिंह रावत ने साफ कहा कि 1920 के समझौते के तहत शुल्क ब्रिटिश सरकार को दिया जाना था, न कि पंजाब को। उन्होंने अनुच्छेद 262 का हवाला देते हुए कहा कि नदियां राष्ट्रीय संसाधन हैं और इन्हें किसी सामान की तरह खरीदा-बेचा नहीं जा सकता। राजस्थान का तर्क है कि आजादी के बाद 1955, 1959 और 1981 में हुए पानी के बंटवारे के समझौतों में कहीं भी रॉयल्टी का प्रावधान नहीं है। राजस्थान सरकार ने स्पष्ट किया है कि वे अपने किसानों के अधिकारों की रक्षा करेंगे और पंजाब की इस 'गैर-कानूनी' मांग का डटकर मुकाबला करेंगे।

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