जयपुरः राजस्थान में नशे के काले कारोबार के खिलाफ एंटी नारकोटिक्स टास्क फोर्स (ANTF) ने अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाई को अंजाम दिया है। ADG दिनेश एम.एन. के निर्देशन और IG विकास कुमार के नेतृत्व में चलाए गए ऑपरेशन जेंटल-मेंटल (Operation Gentle-Mental) की 6 महीने की कड़ी मेहनत के बाद 40000 रुपये का इनामी राजुराम उर्फ राजेश को गिरफ्तार कर लिया गया है। पिछले 7 सालों से पुलिस को चकमा दे रहा यह तस्कर राजस्थान, गुजरात और मध्य प्रदेश में एमडी की सप्लाई चेन का अघोषित 'CEO' बना बैठा था।
कॉर्पोरेट स्टाइल में चलता था ड्रग्स का व्यापार
गिरफ्तार आरोपी राजू ने ड्रग्स की तस्करी को पूरी तरह प्रोफेशनल और कॉर्पोरेट शक्ल दे रखी थी। जांच में सामने आया कि यह गिरोह अलग-अलग विंग्स में बंटा था। हाल ही में कोलकाता से पकड़ा गया तस्कर रमेश 'प्रोडक्शन हेड' था, तो राजू खुद 'चीफ मार्केटिंग सीईओ' की भूमिका में था। उसने अपने नेटवर्क में फैक्ट्री मैनेजर और अकाउंटिंग हेड तक नियुक्त कर रखे थे। राजू का काम फैक्ट्री में माल तैयार होते ही उसे थोक विक्रेताओं तक पहुंचाना था।
15 हजार से 15 लाख की 'ट्रिप' तक का सफर
राजू का अपराध की दुनिया में सफर करीब 12 साल पहले शुरू हुआ था। शुरुआत में वह शराब तस्करी के लिए मात्र 15,000 रुपये प्रति ट्रिप पर काम करता था। कोरोना काल के दौरान उसने अफीम और डोडा-चूरा की तस्करी शुरू की, जहां उसकी कमाई 1.5 लाख रुपये प्रति ट्रिप हो गई लेकिन जब वह 'MD किंग' रमेश के संपर्क में आया, तो उसने अपनी पुरानी पहचान छोड़ दी और सीधे पार्टनर बन गया। राजू एक ट्रिप के 15 लाख रुपये तक कमाने लगा और अब तक करीब 100 करोड़ रुपये मूल्य का जहर बाजार में खपा चुका है।
पिता सरहद के रक्षक, बेटा कानून का भक्षक
हैरानी की बात यह है कि राजू के पिता पांचाराम बॉर्डर होम गार्ड में तैनात हैं और देश की सीमाओं की रक्षा करते हैं। वहीं, राजू अपने पिता की वर्दी का रसूख दिखाकर कानून की धज्जियां उड़ाता रहा। उसने न केवल खुद को बल्कि अपने रिश्तेदारों को भी इस दलदल में धकेला। हाल ही में पकड़ा गया मांगीलाल (फैक्ट्री मैनेजर) राजू का सगा बहनोई है।
जादू-टोना में विश्वास रखता था राजू
राजू की गिरफ्तारी की कहानी किसी फिल्मी स्क्रिप्ट से कम नहीं है। वह तंत्र-मंत्र और जादू-टोने में गहरा विश्वास रखता था और मानता था कि कोई उसे पकड़ नहीं सकता, वह अक्सर अमावस्या पर कैंची धाम और हरिद्वार जाता था। पकड़े जाने के डर से उसने अपने घर के आसपास मुखबिरों का सामरिक नेटवर्क बना रखा था, जिससे वह तीन बार पुलिस को गच्चा देकर खेतों के रास्ते भागने में सफल रहा था।
'ऑपरेशन जेंटल-मेन्टल' का दिलचस्प नाम
इस ऑपरेशन का नाम राजू की दोहरी छवि पर रखा गया। महिलाओं के बीच वह अपनी 'जेंटल' (सुशील) छवि के लिए लोकप्रिय था, जबकि अपराधी साथी उसे मेंटल मानते थे क्योंकि वह सम्मोहन और दिमाग को नियंत्रित करने का दावा करता था। इसी विरोधाभास के कारण मिशन को 'ऑपरेशन जेंटल मेंटल' नाम दिया गया।