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'दिग्गज' नेताओं की छुट्टी, तृणमूल कांग्रेस ने नये चेहरों पर जताया भरोसा

तृणमूल कांग्रेस ने हुगली जिले के कई असरदार MLA को कैंडिडेट लिस्ट में जगह नहीं दी।

श्रीरामपुर: विधानसभा चुनाव से पहले तृणमूल कांग्रेस ने उम्मीदवारों की सूची जारी करते हुए हुगली जिले में बड़ा और चौंकाने वाला फैसला लिया है। पार्टी ने इस बार कई प्रभावशाली, वरिष्ठ और चर्चित विधायकों को टिकट नहीं दिया है, जिससे राजनीतिक हलकों में चर्चाओं का दौर तेज हो गया है। इसे पार्टी के भीतर बड़े स्तर पर बदलाव के तौर पर देखा जा रहा है।

सबसे अधिक चर्चा चार बार के विधायक और लंबे समय तक पार्टी नेतृत्व के बेहद करीबी माने जाने वाले सुदीप्त रॉय को टिकट न मिलने को लेकर हो रही है। वह श्रीरामपुर से लगातार चार बार विधायक रहे हैं और एक बार कोलकाता से भी जीत दर्ज कर चुके हैं। कुल मिलाकर वह पांच बार विधायक रह चुके हैं। भले ही उन्हें मंत्री पद नहीं मिला, लेकिन पिछले कुछ सालों में राज्य के स्वास्थ्य प्रशासन में उनकी भूमिका काफी प्रभावशाली मानी जाती रही है।

डॉक्टरों के तबादले से लेकर मेडिकल परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं तक, कई विवादों में उनका नाम सामने आया, लेकिन इसके बावजूद उनकी राजनीतिक स्थिति मजबूत बनी रही। यहां तक कि ममता बनर्जी ने एक सभा में उनके बारे में कहा था कि सुदीप्त दा का कोई नेगेटिव वॉयस नहीं है। ऐसे नेता को टिकट न मिलना पार्टी के अंदर भी हैरानी का कारण बना हुआ है।

इस बार श्रीरामपुर सीट से पार्टी ने अपने प्रवक्ता तन्मय घोष को उम्मीदवार बनाया है। सुदीप्त रॉय को लेकर पार्टी के एक वर्ग का कहना है कि उनकी उम्र और स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए यह फैसला लिया गया है। हालांकि खुद सुदीप्त रॉय ने बेहद संयमित प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि वह शुरू से पार्टी के एक सिपाही रहे हैं और नेतृत्व के हर निर्णय को स्वीकार करते हैं। उन्होंने कहा कि उनके मन में कोई पछतावा नहीं है।

हुगली जिले में बदलाव की लहर यही तक सीमित नहीं रही। पार्टी ने कई अन्य प्रभावशाली विधायकों को भी इस बार टिकट नहीं दिया। इनमें सप्तग्राम से विधायक तपन दासगुप्ता, चुंचुड़ा से असित मजुमदार, पांडुआ से रत्ना डे नाग, बलागढ़ से मनोरंजन व्यापारी और उत्तरपाड़ा से विधायक एवं अभिनेता कंचन मल्लिक शामिल हैं।

सप्तग्राम के वरिष्ठ नेता तपन दासगुप्ता पार्टी के पुराने और अनुभवी चेहरों में गिने जाते हैं। उन्हें भी इस बार टिकट नहीं मिला। वह पार्टी के सत्ता में आने से पहले ही हुगली जिले के अध्यक्ष रह चुके हैं और कृषि विपणन मंत्री भी रहे हैं। 2021 में वह सप्तग्राम से जीते थे, लेकिन इस बार उनकी जगह फुटबॉलर विदेश बोस को उम्मीदवार बनाया गया है। तपन दासगुप्ता ने इस फैसले पर संक्षिप्त प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि पार्टी ने जो सही समझा, वही किया।

चुंचुड़ा सीट से तीन बार के विधायक असित मजूमदार को भी टिकट नहीं दिया गया। उनकी जगह युवा नेता देबांशु भट्टाचार्य को मौका दिया गया है। असित मजूमदार छात्र राजनीति से उभरे नेता रहे हैं और सिंगूर आंदोलन के दौरान सक्रिय भूमिका निभा चुके हैं। हालांकि, वह समय-समय पर विवादों में भी रहे और पार्टी के भीतर मतभेद भी सामने आए। टिकट न मिलने के बाद उनके समर्थकों में नाराजगी देखी गई। खुद असित ने इसे पीढ़ी परिवर्तन का हिस्सा बताते हुए कहा कि युवा नेतृत्व को आगे आना चाहिए। उन्होंने सक्रिय राजनीति से संन्यास लेने और अपने पेशे-अदालत में लौटने की इच्छा भी जताई। हालांकि पार्टी जिम्मेदारी दे तो वह उस पर विचार करेंगे।

बलागढ़ से विधायक और दलित साहित्यकार मनोरंजन व्यापारी को भी इस बार टिकट नहीं दिया गया है। उनकी जगह जिला परिषद के सभाधिपति रंजन धाड़ा को उम्मीदवार बनाया गया है। बताया जा रहा है कि स्थानीय स्तर पर भूमिपुत्र उम्मीदवार की मांग को देखते हुए यह फैसला लिया गया। मनोरंजन व्यापारी ने पार्टी के फैसले को स्वीकार करते हुए कहा कि वह नेतृत्व के निर्णय के साथ हैं।

उत्तरपाड़ा से विधायक और अभिनेता कंचन मल्लिक को भी टिकट नहीं मिला। उनकी जगह युवा वकील शीर्षण्य बंद्योपाध्याय को उम्मीदवार बनाया गया है, जो सांसद कल्याण बंद्योपाध्याय के पुत्र हैं।

पांडुआ सीट से भी बड़ा बदलाव करते हुए पार्टी ने वरिष्ठ नेता और पूर्व सांसद रत्ना डे नाग को टिकट नहीं दिया। रत्ना डे नाग लंबे समय से पार्टी नेतृत्व के भरोसेमंद चेहरों में रही हैं और अतीत में विधायक व सांसद दोनों रह चुकी हैं। 2021 में उन्हें पांडुआ से विधायक बनाया गया था, लेकिन इस बार उनकी जगह पार्टी के पुराने कार्यकर्ता समीर चक्रवर्ती को उम्मीदवार बनाया गया है। रत्ना ने भी पार्टी के फैसले का समर्थन करते हुए कहा कि जिसे भी उम्मीदवार बनाया गया है, वही उनका उम्मीदवार है और वह उसके लिए प्रचार करेंगी।

हालांकि, जहां एक ओर कई बड़े चेहरों को हटाया गया है, वहीं पार्टी ने कुछ मौजूदा विधायकों पर भरोसा कायम रखा है। जंगीपाड़ा से स्नेहाशीष चक्रवर्ती, चंडीतला से स्वाती खंदकार, सिंगुर से बेचाराम मान्ना, हरिपाल से करबी मान्ना समेत कई नेताओं को दोबारा मौका दिया गया है।

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि हुगली जिले में इस तरह के व्यापक बदलाव से साफ है कि पार्टी चुनाव से पहले संगठन को नए सिरे से तैयार कर रही है। अनुभवी नेताओं के साथ-साथ युवा और अपेक्षाकृत नए चेहरों को आगे लाकर पार्टी संतुलन बनाने की कोशिश कर रही है। यह रणनीति कितनी सफल होगी, इसका जवाब चुनाव परिणाम ही देंगे, लेकिन फिलहाल इस फैसले ने राज्य की राजनीति में नई बहस जरूर छेड़ दी है।

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