तलाक या ब्रेकअप के बाद नया रिश्ता बनाने में कुछ समय लगता है। इस दौरान बिल्कुल जल्दीबाजी नहीं करनी चाहिए। लेकिन नए रिश्ते में यदि बार-बार पहले वाले साथी की याद आती है, तो क्या होगा? ऐसा अक्सर होता है।
कड़वाहट भुला भी दी जाए, पुराने घाव भूलना मुश्किल होता है। यही नहीं, मन में यह डर भी रहता है कि फिर से पुराने अनुभवों का सामना न करना पड़े। लेकिन अगर पुराने अनुभवों को मन में दबा कर रखा जाएगा, तो उसका असर नए रिश्ते पर पड़ेगा। इसलिए नए जीवन की शुरुआत करने से पहले इन कुछ बातों का ध्यान रखें।
जल्दीबाजी बिल्कुल नहीं
पुरानी पीड़ा को भुलाने के लिए अचानक नए रिश्ते में कूदना सही नहीं है। ‘रिबाउंड’ खोजने की कोशिश में आप मुश्किल में पड़ सकते हैं। इसलिए धीरे-धीरे आगे बढ़ें। एक-दूसरे के साथ समय बिताएं, एक-दूसरे को जानें। पहले दोस्ती बनाएं, उसके बाद रिश्ते की बात सोचें।
रिश्ते में पारदर्शिता रखें
एक-दूसरे के बारे में थोड़ी जानकारी रखना जरूरी है। लेकिन यह तब करें जब रिश्ता मजबूत हो। शुरुआती चरण में सभी निजी बातें साझा करना ठीक नहीं है। हालांकि, एक-दूसरे के बारे में कुछ जानना और यह स्पष्ट करना कि आप इस रिश्ते से क्या चाहते हैं, जरूरी है। यह पारदर्शिता दोनों पक्षों में होनी चाहिए। इससे बाद में गलतफहमियों से बचा जा सकेगा।
तुलना नहीं करें
नए रिश्ते में हमेशा साथी की तुलना पुराने साथी से न करें। इससे साथी को अनदेखा महसूस होता है और आप दोनों के बीच दूरी बढ़ती है। साथ ही यह भी साफ दिखाता है कि आप अभी भी पुराने रिश्ते से बाहर नहीं आए हैं।
अंधविश्वास नहीं
जितना भी आगे बढ़ें, पुराने अनुभव याद आते रहेंगे। पुराने अनुभवों का सामना न करना है, इसके लिए रिश्ते में कुछ सीमाएं तय करें। साथी पर अंधविश्वास न करें और अधिक उम्मीदें न रखें। इससे दिल टूटने की संभावना और बढ़ जाती है।