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माता-पिता की ये 3 गलतियां बच्चों को कर देती है उनसे दूर, समय रहते संभल जाएं

हर माता-पिता चाहते हैं कि उनका बच्चा संस्कारी, समझदार और जिम्मेदार बने, फिर भी कई बार अनजाने में कुछ ऐसे व्यवहार हो जाते हैं जिनका बच्चों के मन पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है।

By राखी मल्लिक

Mar 11, 2026 18:09 IST

बच्चों की परवरिश जीवन की सबसे महत्वपूर्ण जिम्मेदारियों में से एक है। हर माता-पिता चाहते हैं कि उनका बच्चा संस्कारी, समझदार और जिम्मेदार बने। इसके लिए वे पूरी मेहनत करते हैं और उन्हें अच्छी शिक्षा, सुविधाएं तथा सुरक्षित वातावरण देने का प्रयास करते हैं।

फिर भी कई बार अनजाने में कुछ ऐसे व्यवहार हो जाते हैं जिनका बच्चों के मन पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है। धीरे-धीरे यही बातें माता-पिता और बच्चों के बीच दूरी पैदा कर सकती हैं। इसलिए आवश्यक है कि अभिभावक अपनी कुछ आदतों पर ध्यान दें और समझदारी से बच्चों का मार्गदर्शन करें।

1. कठोर दंड और डर का वातावरण

कई बार माता-पिता गुस्से में बच्चे को कमरे में बंद कर देते हैं या उसे थप्पड़ मार देते हैं। इस प्रकार का व्यवहार अनुशासन सिखाने का सही तरीका नहीं माना जाता। इससे बच्चे के मन में भय उत्पन्न होता है और वह असुरक्षित महसूस करने लगता है। डर के कारण वह अपनी गलतियां छिपाने लगता है और माता-पिता से खुलकर बात करने से बचता है। समय के साथ यह स्थिति विश्वास को कमजोर कर सकती है। इसलिए बच्चों की गलती पर शांत रहकर समझाना अधिक प्रभावी होता है।

2. संवाद बंद कर देना और भावनाओं की अनदेखा करना

कुछ अभिभावक नाराज होने पर बच्चे से बात करना बंद कर देते हैं। बाहर से यह तरीका शांत दिखाई देता है, लेकिन अंदर ही अंदर बच्चे के आत्मसम्मान को ठेस पहुंचाता है। वह स्वयं को उपेक्षित महसूस करता है और सोचने लगता है कि शायद वह प्यार के योग्य नहीं है। यदि यह स्थिति लंबे समय तक बनी रहे तो बच्चे के मन में असुरक्षा और दूरी की भावना बढ़ सकती है। बेहतर है कि माता-पिता बच्चों से खुलकर बातचीत करें और उनकी भावनाओं को समझने की कोशिश करें।

3. तुलना और अत्यधिक आलोचना

अक्सर देखा जाता है कि माता-पिता अपने बच्चे की तुलना अन्य बच्चों से करते हैं। पढ़ाई, खेल या व्यवहार के आधार पर की गई ऐसी तुलना बच्चे के आत्मविश्वास को कम कर देती है। इसके अलावा यदि हर छोटी गलती पर डांट दी जाए और उसकी अच्छी बातों की सराहना न की जाए, तो बच्चे का मनोबल धीरे-धीरे कमजोर हो सकता है। सकारात्मक प्रोत्साहन और प्रशंसा बच्चों के व्यक्तित्व विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।

अंततः बच्चों को सही दिशा देने के लिए प्रेम, धैर्य और समझदारी आवश्यक है। यदि माता-पिता संवाद, विश्वास और सहयोग का वातावरण बनाए रखते हैं, तो बच्चे भी उनसे जुड़ाव महसूस करते हैं और जीवन के हर चरण में उनका सम्मान करते हैं।

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