नई दिल्लीः भारत की उभरती वैश्विक भूमिका और नेतृत्व की नई सोच को दुनिया के युवा दिमागों तक पहुंचाने के उद्देश्य से एनएक्सटी फाउंडेशन ने एक विशेष पहल की शुरुआत की है। ‘एनएक्सटी फेलोशिप’ नाम से शुरू किया गया यह एक सप्ताह का इमर्सिव कार्यक्रम नई पीढ़ी के वैश्विक नेताओं को भारत की नीतियों, विचारों और सांस्कृतिक विरासत से सीधे जोड़ने का मंच प्रदान करता है।
यह फेलोशिप भारत मंडपम में आयोजित एनएक्सटी समिट के दूसरे संस्करण के साथ शुरू की गई है। कार्यक्रम का उद्देश्य विभिन्न देशों के प्रतिभाशाली युवाओं को भारत की विकास यात्रा को करीब से समझने और वैश्विक नेतृत्व के नए दृष्टिकोण पर संवाद का अवसर देना है।
दुनिया के प्रतिष्ठित विश्वविद्यालयों से पहुंचे फेलो
इस पहली बैच में दुनिया के कई नामी विश्वविद्यालयों के छात्र और शोधार्थी शामिल हुए हैं। इनमें हार्वर्ड यूनिवर्सिटी, स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी, यूनिवर्सिटी ऑफ कैम्ब्रिज, यूनिवर्सिटी ऑफ ऑक्सफोर्ड, लंदन स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स, त्सिंघुआ यूनिवर्सिटी, जॉन्स हॉपकिन्स यूनिवर्सिटी, टफ्ट्स यूनिवर्सिटी - द फ्लेचर स्कूल, नेशनल यूनिवर्सिटी ऑफ सिंगापुर और यूनिवर्सिटी ऑफ टोक्यो जैसे संस्थान शामिल हैं।
भारत के प्रमुख संस्थानों से भी प्रतिनिधित्व देखने को मिला है, जिनमें इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी मद्रास, इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस बेंगलुरु और आईआईटी गांधीनगर शामिल हैं।
आर्मेनिया और भूटान से लेकर अमेरिका, यूरोप और पूर्वी एशिया तक के प्रतिभागियों की मौजूदगी इस कार्यक्रम के वैश्विक स्वरूप को दर्शाती है।
आठ दिनों में 100 सत्रों का गहन कार्यक्रम
फेलोशिप के दौरान प्रतिभागी आठ दिनों में आयोजित 100 सत्रों में हिस्सा ले रहे हैं। इन सत्रों में संवाद, अध्ययन यात्राएं और सांस्कृतिक अनुभव शामिल हैं, जिनके माध्यम से प्रतिभागियों को भारत की नीतियों, संस्थाओं और भविष्य की आकांक्षाओं को समझने का अवसर मिल रहा है।
दिन की शुरुआत योग अभ्यास से होती है, जिसमें शारीरिक मुद्राओं और श्वास तकनीकों के जरिए प्रतिभागियों को मानसिक और शारीरिक संतुलन के साथ दिन की शुरुआत करने का अवसर दिया जाता है।
भारत की विरासत से भी परिचय
फेलोशिप का एक महत्वपूर्ण हिस्सा भारत की सांस्कृतिक विरासत से परिचय भी है। प्रतिभागियों ने राजस्थान के ऐतिहासिक 15वीं सदी के नीमराना फोर्ट पैलेस का दौरा किया, जहां उन्होंने ‘भारत बाजार’ के तहत पारंपरिक भारतीय वस्तुओं और शिल्प का अनुभव लिया।
नीति, अर्थव्यवस्था और कूटनीति पर विशेष संवाद
कार्यक्रम के दौरान प्रतिभागियों को भारत के कई प्रमुख नीति विशेषज्ञों और विचारकों के साथ बातचीत का मौका भी मिला। इनमें अर्थशास्त्री और पूर्व मुख्य आर्थिक सलाहकार कृष्णमूर्ति वी. सुब्रमणियन, वरिष्ठ राजनयिक भास्वती मुखर्जी और अजय बिसारिया, इतिहासकार हिंदोल सेनगुप्ता, विकास अर्थशास्त्री मिताली निकोरे तथा लेफ्टिनेंट जनरल पीजेएस पन्नू शामिल हैं।
इन संवादों में भारत की आर्थिक परिवर्तन यात्रा, विदेश नीति और वैश्विक व्यवस्था में उसकी बढ़ती भूमिका जैसे विषयों पर चर्चा की गई।
‘पीक ह्यूमैनिटी’ की दिशा में साझा पहल
फेलोशिप के तहत 70 फेलो केवल भारत की यात्रा को देखने भर नहीं आए हैं, बल्कि वे वैश्विक भविष्य और नई पीढ़ी की भूमिका पर चल रही साझा बातचीत का सक्रिय हिस्सा भी हैं। “100 सत्र, 70 फेलो, 39 विश्वविद्यालय, 8 दिन, 1 मिशन-पीक ह्यूमैनिटी की ओर” के संदेश के साथ यह कार्यक्रम उभरते वैश्विक नेताओं को एक साझा मंच देने का प्रयास है, जहां से वे भविष्य की दिशा तय करने में योगदान दे सकें।