नई दिल्लीः पूर्व यूजीसी अध्यक्ष एम. जगदीश कुमार ने कहा कि आज के दौर में ऑटोमेशन और तकनीकी बदलाव तेजी से कामकाज की दुनिया को बदल रहे हैं। भविष्य में रूटीन और दोहराए जाने वाले कार्य मशीनों द्वारा किए जाएंगे, इसलिए युवाओं को केवल जानकारी हासिल करने तक सीमित नहीं रहकर जजमेंट, क्रिएटिविटी, विषय विशेषज्ञता, नैतिक तर्क और टीमवर्क जैसे उच्च स्तरीय कौशल सीखने होंगे।
“भारती नारी टू नारायणी: नेशनल कन्वेंशन ऑफ वूमेन थॉट लीडर्स” में कुमार ने यह बात कही। उन्होंने तीन प्रमुख क्षेत्रों-ज्ञान, कामकाज और शक्ति में तेजी से बदलाव की ओर इशारा किया। ज्ञान के क्षेत्र में, आज हर व्यक्ति तक विशाल मात्रा में जानकारी पहुंचती है, लेकिन चुनौती यह है कि इसे उपयोगी ज्ञान में कैसे बदला जाए ताकि यह निर्णय और कार्य में मदद करे।
कुमार ने कहा कि इसके लिए शिक्षा प्रणाली को भी आलोचनात्मक सोच, सवाल पूछने और समस्या समाधान की क्षमता विकसित करने पर जोर देना होगा। इसके साथ ही, कामकाज के क्षेत्र में युवाओं को ऐसी क्षमताओं पर ध्यान देना होगा जो मशीनों द्वारा नहीं की जा सकती।
उन्होंने तीसरे क्षेत्र-शक्ति के बदलाव की ओर इशारा करते हुए कहा कि वैश्विक स्तर पर वही देश आगे हैं जो डेटा, कंप्यूटिंग और तकनीकी मॉडल पर नियंत्रण रखते हैं। ऐसे में यह जरूरी है कि भारत के युवाओं, खासकर महिलाओं को वैश्विक प्रतिस्पर्धा के लिए सक्षम बनाया जाए।
कुमार ने जोर दिया कि शिक्षा का उद्देश्य केवल डिग्री हासिल करना नहीं होना चाहिए, बल्कि छात्रों को प्रमाणित कौशल और दक्षताओं से लैस करना महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि अगर यह लक्ष्य हासिल किया गया तो 2047 तक भारत अपनी युवा पीढ़ी, विशेषकर महिलाओं, को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धा करने में सक्षम बना सकता है।