वाशिंगटन डी सी : अमेरिका के श्रम बाजार को लेकर नई चिंता पैदा हो गई है। फरवरी महीने में वहां नौकरियों की संख्या घटी है और बेरोजगारी दर बढ़ी है। इससे श्रम बाजार की मजबूती को लेकर फिर से सवाल उठने लगे हैं।
शुक्रवार को जारी अमेरिका के ब्यूरो ऑफ लेबर स्टैटिस्टिक्स के आंकड़ों के अनुसार पिछले महीने नॉनफार्म पेरोल में 92 हजार की कमी आई है। साल की शुरुआत में अपेक्षाकृत मजबूत भर्ती के बाद यह गिरावट चर्चा का विषय बन गई है। साथ ही बेरोजगारी दर बढ़कर 4.4 प्रतिशत हो गई है।
रिपोर्ट के अनुसार हेल्थकेयर सेक्टर में कर्मचारियों की संख्या घटने को भी इस गिरावट का एक बड़ा कारण माना जा रहा है। इस क्षेत्र में चल रही हड़ताल का असर भर्ती पर पड़ा है।
इन आंकड़ों के सामने आने के बाद अमेरिका के श्रम बाजार की स्थिरता को लेकर सवाल उठ रहे हैं। हालांकि साल की शुरुआत में नौकरी बढ़ने की गति तेज थी और बेरोजगारी भत्ते के लिए आवेदन अभी भी तुलनात्मक रूप से कम हैं। विश्लेषकों के मुताबिक कई कंपनियों ने पहले ही छंटनी की घोषणा की थी, जो अब धीरे-धीरे लागू हो रही है।
इस बीच तकनीकी बदलाव भी रोजगार पर असर डाल रहे हैं। खासकर कृत्रिम बुद्धिमत्ता में निवेश बढ़ने के कारण कई कंपनियां कम कर्मचारियों के साथ भी काम चला पा रही हैं। इससे उत्पादकता बढ़ रही है, लेकिन कर्मचारियों की संख्या संभवत: कम हो रही है।
इस स्थिति का असर अमेरिका के केंद्रीय बैंक फेडरल रिजर्व की ब्याज दर संबंधी नीति पर भी पड़ सकता है। हाल के समय में नीति निर्धारक महंगाई पर ज्यादा ध्यान दे रहे थे। लेकिन श्रम बाज़ार में आए इस बदलाव से उनका ध्यान फिर से रोजगार की स्थिति की ओर जा सकता है, ऐसा माना जा रहा है।
इस बारे में व्हाइट हाउस के आर्थिक सलाहकार केविन हैसेट ने कहा कि नौकरियों की संख्या घटने के बावजूद अमेरिका की अर्थव्यवस्था अभी भी बहुत मजबूत है। CNBC को दिए इंटरव्यू में उन्होंने कहा कि सिर्फ एक महीने के आंकड़ों के आधार पर निष्कर्ष निकालना ठीक नहीं है। कुछ महीनों की प्रवृत्ति देखकर ही भर्ती की स्थिति का आकलन किया जाना चाहिए।