नयी दिल्लीः भारत की ऊर्जा परिवर्तन यात्रा को वैश्विक स्तर पर एक महत्वपूर्ण पहचान मिली है। देश के प्रमुख औद्योगिक समूह अडानी ग्रुप (Adani Group) को वर्ष 2026 के वर्ल्ड इंजीनियरिंग डे फॉर सस्टेनेबल डेवलपमेंट के लिए आधिकारिक साझेदार चुना गया है।
यह अंतरराष्ट्रीय दिवस UNESCO (यूनेस्को) द्वारा मान्यता प्राप्त है और इसका संचालन वर्ल्ड फेडरेशन ऑफ इंजीनियरिंग ऑर्गेनाइजेशन्स करता है।
महत्वपूर्ण बात यह है कि डब्ल्यूएफईओ ने पहली बार किसी भारतीय संगठन को इस वैश्विक पहल से जोड़ा है। इस साझेदारी का उद्देश्य इंजीनियरों के योगदान को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान देना और टिकाऊ विकास में इंजीनियरिंग की भूमिका को रेखांकित करना है।
भारत की हरित ऊर्जा परियोजना को वैश्विक पहचान
इस सहयोग का केंद्र गुजरात के कच्छ क्षेत्र में विकसित हो रहा खावड़ा नवीकरणीय ऊर्जा प्रोजेक्ट है, जिसे डब्ल्यूएफईओ ने भारत के ऊर्जा परिवर्तन का प्रमुख उदाहरण बताया है।
यह परियोजना दुनिया का सबसे बड़ा नवीकरणीय ऊर्जा संयंत्र बनने की दिशा में आगे बढ़ रही है। लगभग 538 वर्ग किलोमीटर में फैला यह प्रोजेक्ट बंजर भूमि पर विकसित किया जा रहा है, जो क्षेत्रफल के लिहाज से पेरिस शहर से लगभग पांच गुना बड़ा है।
इस परियोजना का नेतृत्व अडानी ग्रीन एनर्जी लिमिटेड (Adani Green Energy Limited) कर रही है। इसके साथ अडानी एनर्जी सॉल्यूशंस और अडानी न्यू इंडस्ट्रीज जैसी समूह की अन्य इकाइयां भी इसमें सहयोग कर रही हैं।
30 गीगावाट क्षमता का लक्ष्य
खावड़ा परियोजना का लक्ष्य वर्ष 2029 तक 30 गीगावाट उत्पादन क्षमता हासिल करना है। यदि यह लक्ष्य पूरा होता है तो यह दुनिया का सबसे बड़ा एकीकृत नवीकरणीय ऊर्जा पार्क बन जाएगा।
अडानी ग्रीन एनर्जी के कार्यकारी निदेशक सागर अडानी के अनुसार, यह परियोजना यह साबित करती है कि स्वच्छ ऊर्जा बड़े पैमाने पर भी किफायती और समावेशी हो सकती है। उनका कहना है कि यह पहल भारत की जलवायु कार्रवाई का प्रतीक है, जिसमें विकास और स्थिरता साथ-साथ आगे बढ़ सकते हैं।
स्मार्ट इंजीनियरिंग और तकनीक की भूमिका
वर्ष 2026 के इस वैश्विक दिवस की थीम “नवाचार और डिजिटलीकरण के माध्यम से टिकाऊ भविष्य के लिए स्मार्ट इंजीनियरिंग” रखी गई है।
विशेषज्ञों के अनुसार अडानी समूह द्वारा नवीकरणीय ऊर्जा, डिजिटल अवसंरचना, परिवहन नेटवर्क और उपयोगिता प्रणालियों में किए जा रहे बड़े पैमाने के निवेश इस दृष्टि के अनुरूप हैं। इससे यह भी स्पष्ट होता है कि तकनीक आधारित इंजीनियरिंग समाधान वास्तविक परिस्थितियों में टिकाऊ विकास को आगे बढ़ाने में अहम भूमिका निभा सकते हैं।
वैश्विक मंच पर भारत की ऊर्जा परिवर्तन कहानी
डब्ल्यूएफईओ ने अपने वर्ल्ड इंजीनियरिंग डे 2026 कार्यक्रम के तहत खावड़ा परियोजना पर एक लघु फिल्म भी प्रस्तुत की है, जिसमें इस परियोजना के पैमाने, महत्वाकांक्षा और संभावित प्रभाव को दर्शाया गया है।
विश्लेषकों के अनुसार यह साझेदारी केवल एक कॉर्पोरेट उपलब्धि नहीं है, बल्कि यह संकेत भी है कि भारत की हरित ऊर्जा परियोजनाएं अब वैश्विक ऊर्जा परिवर्तन के मॉडल के रूप में उभर रही हैं।