नई दिल्लीः पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच वैश्विक आर्थिक परिदृश्य को लेकर चिंताएं गहराने लगी हैं। इसी संदर्भ में इंटरनेशनल मॉनिटरी फंड (International Monetary Fund) (आईएमएफ) ने कहा है कि वह हालात पर करीबी नजर रखे हुए है। यह भी स्पष्ट है कि इस समय क्षेत्रीय या वैश्विक अर्थव्यवस्था पर पड़ने वाले प्रभाव का आंकलन करना जल्दबाजी होगी।
आईएमएफ ने अपने बयान में कहा कि मौजूदा स्थिति अत्यंत गतिशील है और पहले से अनिश्चित वैश्विक आर्थिक माहौल में और अस्थिरता जोड़ रही है। संस्था ने यह भी संकेत दिया कि व्यापार और आर्थिक गतिविधियों में व्यवधान, ऊर्जा कीमतों में उछाल तथा वित्तीय बाजारों में अस्थिरता देखी गई है। हालांकि, वास्तविक आर्थिक असर इस बात पर निर्भर करेगा कि संघर्ष कितने व्यापक स्तर तक फैलता है और कितने समय तक जारी रहता है।
इस बीच भारत सरकार भी हालात पर लगातार नजर बनाए हुए है। केंद्रीय पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी (Hardeep Singh Puri) ने मीडिया को संबोधित करते हुए स्पष्ट किया कि बदलती परिस्थितियों के बावजूद देश पूरी तरह तैयार है और ऊर्जा आपूर्ति मजबूत स्थिति में है। उन्होंने बताया कि भारत के पास कच्चे तेल और पेट्रोलियम उत्पादों-जैसे पेट्रोल, डीजल और एटीएफ का पर्याप्त भंडार मौजूद है, जिससे अल्पकालिक आपूर्ति बाधाओं से निपटा जा सकता है।
सरकार के अनुसार, भारतीय ऊर्जा कंपनियों के पास ऐसे स्रोत भी उपलब्ध हैं जिनकी आपूर्ति होर्मुज जलडमरूमध्य के रास्ते पर निर्भर नहीं है। इससे उन खेपों के प्रभावित होने की स्थिति में भी वैकल्पिक आपूर्ति सुनिश्चित की जा सकेगी। सरकार ने यह भी स्पष्ट किया कि केवल लगभग 40 प्रतिशत कच्चा तेल आयात ही होर्मुज जलडमरूमध्य से होकर गुजरता है, जिससे क्षेत्रीय व्यवधान का जोखिम सीमित हो जाता है।
पेट्रोलियम मंत्रालय ने देशभर में पेट्रोलियम उत्पादों की आपूर्ति और भंडार की स्थिति पर नजर रखने के लिए 24x7 कंट्रोल रूम भी स्थापित किया है। मंत्री ने कहा कि सरकार मौजूदा स्टॉक स्थिति को लेकर संतुष्ट है और भारतीय उपभोक्ताओं के हितों की रक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है। आवश्यक होने पर चरणबद्ध उपायों के जरिए स्थिति को और संतुलित किया जा सकता है।
सरकारी सूत्रों के मुताबिक, भारत के पास रणनीतिक भंडार सहित कुल आठ सप्ताह का कच्चे तेल और पेट्रोलियम उत्पादों का स्टॉक उपलब्ध है। विविध स्रोतों से आयात और पर्याप्त इन्वेंट्री के कारण ऊर्जा सुरक्षा के मोर्चे पर देश फिलहाल सहज स्थिति में है।
पश्चिम एशिया में जारी तनाव ने वैश्विक बाजारों में हलचल जरूर पैदा की है। भारत ने स्पष्ट संकेत दिया है कि वह संभावित आपूर्ति चुनौतियों से निपटने के लिए तैयार है। आने वाले दिनों में संघर्ष की दिशा और अवधि ही तय करेगी कि इसका व्यापक आर्थिक असर कितना गहरा होगा।