नई दिल्ली : तेल की कीमतें लगातार बढ़ती रहीं, तो इसका नकारात्मक असर एशियाई शेयर बाजारों पर पड़ सकता है, ऐसा इन्वेस्को की एक रिपोर्ट से पता चला है हालांकि यदि मौजूदा संघर्ष जल्दी समाप्त हो जाता है, तो बाजारों पर इसका प्रभाव केवल अस्थायी रहेगा।
रिपोर्ट में कहा गया है कि तेल की कीमतों में लंबे समय तक वृद्धि से एशिया सहित शेयर बाजारों पर दबाव पड़ेगा। इसके विपरीत, संघर्ष का शीघ्र समाधान होने पर नुकसान सीमित रह सकता है।
वैसे भू-राजनीतिक परिणामों की भविष्यवाणी करना मुश्किल है, लेकिन लगातार तनाव एशिया की कुल अर्थव्यवस्था के लिए जोखिम पैदा करता है। यदि आपूर्ति-संबंधी बाधाओं के कारण तेल की कीमतें लंबे समय तक ऊंची बनी रहती हैं, तो क्षेत्र में आर्थिक वृद्धि धीमी हो सकती है और मैक्रो स्थिरता पर असर पड़ सकता है।
एशियाई देशों में थाईलैंड, भारत, कोरिया और फिलीपींस को उच्च तेल आयात निर्भरता के कारण अधिक जोखिम वाला माना गया है, जबकि मलेशिया ऊर्जा निर्यातक होने के कारण अपेक्षाकृत लाभार्थी हो सकता है। इस स्थिति में भारतीय रुपये और कोरियाई वोन को अल्पकालिक दबाव का सामना करना पड़ सकता है।
रिपोर्ट में कहा गया कि तेल की कीमतों की अवधि और लगातार ऊंची बनी रहने वाली प्रवृत्ति आर्थिक प्रभाव का मुख्य निर्धारक होगी।
मुद्रास्फीति के संदर्भ में रिपोर्ट ने बताया कि उच्च तेल कीमतें बड़े ऊर्जा आयातक देशों जैसे कोरिया और ताइवान में मुद्रास्फीति के जोखिम बढ़ा सकती हैं। हालांकि इन देशों के केंद्रीय बैंक संभवतः आपूर्ति-संबंधी मुद्रास्फीति दबाव को गंभीरता से नहीं लेंगे।
रिपोर्ट ने निवेशकों को सलाह दी कि वे संघर्ष की अवधि और तेल की कीमतों की दिशा पर ध्यान रखें। यदि तेल की कीमतें लगातार बढ़ती रहती हैं, तो इसका नकारात्मक असर एशियाई शेयर बाजारों पर पड़ेगा, और तनाव की स्थिति लगातार अस्थायी बनें रपने की संभावना है।
इन जोखिमों के बावजूद रिपोर्ट में कहा गया कि एशिया की व्यापक आर्थिक स्थिति मजबूत बनी हुई है, विशेष रूप से एआई से जुड़े पूंजीगत निवेश के कारण अर्धचालक (सेमिकंडक्टर) क्षेत्र में मजबूती है। जो उच्च तेल कीमतों के नकारात्मक असर को आंशिक रूप से कम कर सकती है।
इसके अलावा यदि क्षेत्र की आर्थिक वृद्धि प्रभावित होती है, तो केंद्रीय बैंक मौद्रिक नीति ढीली कर सकते हैं और वित्तीय प्रोत्साहन बढ़ा सकते हैं। एएनआई की रिपोर्ट में यह भी नोट किया गया कि एशियाई मैक्रो आर्थिक आधार मजबूत है और इस वर्ष क्षेत्र की जीडीपी वृद्धि में किसी बदलाव की उम्मीद नहीं है।