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ईरान–इज़राइल युद्ध के माहौल में अशांति फैलाने की कोशिश? केंद्र की चेतावनी

हर राज्य को किसी भी संदिग्ध गतिविधि पर नजर रखने और तुरंत आवश्यक कदम उठाने को कहा गया

By अरिंदम बंद्योपाध्याय, Posted by डॉ.अभिज्ञात

Mar 03, 2026 16:03 IST

नई दिल्ली: ईरान और इज़राइल के बीच युद्ध की पृष्ठभूमि में देश के किसी भी राज्य में राष्ट्रविरोधी ताकतें अशांति और हिंसा का माहौल बना सकती हैं-ऐसे ठोस इनपुट केंद्रीय खुफिया एजेंसियों को मिले हैं। इन सूचनाओं को केंद्रीय गृह मंत्रालय को सौंप दिया गया है। इसके आधार पर गृह मंत्रालय ने सभी राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों को अलर्ट जारी किया है।

खुफिया सूत्रों के अनुसार देश के बड़े शहरों में अलगाववादी संगठन लोगों को भड़काकर सड़कों पर उतार सकते हैं और विरोध प्रदर्शन करा सकते हैं। सभी राज्यों को निर्देश दिए गए हैं कि वे किसी भी संदिग्ध गतिविधि पर कड़ी नजर रखें और तुरंत आवश्यक कार्रवाई करें।

रविवार को श्रीनगर, लखनऊ, मुरादाबाद, मेरठ सहित देश के विभिन्न हिस्सों में ईरान के सर्वोच्च नेता आयातुल्लाह खामेनेई की मौत को लेकर बड़े पैमाने पर प्रदर्शन हुए। श्रीनगर के लाल चौक समेत कई इलाकों में हजारों लोगों की भीड़ और विरोध-प्रदर्शन की तस्वीरें सामने आने के बाद घाटी के बड़े हिस्से में इंटरनेट सेवाएं बंद कर दी गईं।

इन घटनाओं और खुफिया इनपुट के मद्देनज़र केंद्र ने कोई जोखिम नहीं लिया। सभी राज्यों को सतर्क करने के साथ-साथ दिल्ली में हाई अलर्ट जारी किया गया है। दिल्ली में स्थित विभिन्न देशों के दूतावासों की सुरक्षा भी कड़ी कर दी गई है, विशेष रूप से अमेरिका, ईरान और इज़राइल के दूतावासों की सुरक्षा कई गुना बढ़ाई गई है। इन दूतावासों के बाहर दिल्ली पुलिस की क्विक एक्शन टीम और डॉग स्क्वॉड तैनात किए गए हैं। किसी भी स्थिति से निपटने के लिए कमांडो बल और बम निरोधक दस्ते को भी तैयार रखा गया है।

सोमवार को दिल्ली पुलिस सूत्रों ने बताया कि चाणक्यपुरी के डिप्लोमैटिक ज़ोन के अलावा भीड़भाड़ वाले बाजारों, मल्टीप्लेक्स और बड़े मॉल्स की सुरक्षा बढ़ा दी गई है। इन इलाकों में भारतीय न्याय संहिता की धारा 163 के तहत किसी भी बड़े जमावड़े पर प्रतिबंध लगाया गया है। साथ ही जाफराबाद, सीलमपुर, मुस्तफाबाद, चांदनी चौक, जामा मस्जिद और ओखला जैसे अल्पसंख्यक बहुल क्षेत्रों में दिन-रात पुलिस गश्त तेज कर दी गई है।

सोशल मीडिया पर किसी भी भड़काऊ या उकसाने वाली सामग्री के जरिए सांप्रदायिक अशांति फैलाने की कोशिशों पर भी विशेष नजर रखी जा रही है।

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