होली यानी रंगों का त्योहार, खुशियों में डूबने का मौका है लेकिन कुछ लोगों के लिए यही त्योहार सिरदर्द का कारण बन जाता है। होली माइग्रेन की समस्या बढ़ा देता है। रंग खेलने उतरते ही कई लोग असहनीय सिरदर्द का शिकार हो जाते हैं। माइग्रेन एक न्यूरोलॉजिकल स्थिति है। तेज रोशनी या आवाज, मानसिक तनाव या डिहाइड्रेशन के कारण माइग्रेन का दर्द ट्रिगर होता है। तो रंगों का माइग्रेन से क्या संबंध है?
रंग खेलने से माइग्रेन क्यों ट्रिगर होता है?
होली के अधिकतर रंग रासायनिक तत्वों से बने होते हैं। ज्यादातर सिंथेटिक गुलाल होते हैं। इनमें भारी धातुएं और विषैले कण मौजूद रहते हैं। ये सीधे त्वचा, आंखों और श्वसन तंत्र पर असर डालते हैं। रंगों का पाउडर नाक के जरिए मस्तिष्क की रक्त वाहिकाओं तक पहुंचता है और नसों को उत्तेजित करता है। तभी माइग्रेन ट्रिगर हो जाता है।
होली में माइग्रेन होने के और क्या कारण हैं?
1. तेज धूप में ही रंग खेला जाता है। धूप भी माइग्रेन के दर्द को ट्रिगर करती है। रोशनी और रंगों का प्रतिबिंब आंखों और मस्तिष्क पर दबाव डालता है। तभी सिरदर्द बढ़ता है।
2. धूप में लगातार रंग खेलते रहते हैं। त्योहार के माहौल में कई लोग पानी पीना भूल जाते हैं। लंबे समय तक पानी न पीने से भी माइग्रेन का दर्द शुरू हो जाता है।
3. शोर की वजह से भी माइग्रेन का दर्द हो सकता है। लाउडस्पीकर की आवाज, तेज संगीत, चिल्लाकर बात करना, होली के दिन ये सब ज्यादा होता है। इससे भी कई बार माइग्रेन की समस्या बढ़ जाती है।
होली में माइग्रेन की समस्या से कैसे बचें?
- रसायनिक रंगों की जगह प्राकृतिक रंग और गुलाल से होली खेल सकते हैं।
- धूप में लंबे समय तक न रहें। दोपहर से पहले ही रंग खेलना खत्म कर सकते हैं।
- रंग खेलते समय बार-बार पानी पीते रहें। नारियल पानी, ओआरएस का घोल भी पी सकते हैं। शराब से परहेज करें।
- होली खेलते समय टोपी और सनग्लास का इस्तेमाल करें।