शुक्रवार दोपहर 1 बजकर 22 मिनट पर कोलकाता में भूकंप महसूस किया गया। हावड़ा, उत्तर 24 परगना, दक्षिण 24 परगना, नदिया सहित दक्षिण बंगाल के विस्तृत इलाकों में झटके महसूस किए गए। पहले झटके के बाद भी कई बार जमीन कांपी। ये आफ्टरशॉक मानव शरीर पर भी प्रभाव डालता हैं। कंपन रुक जाने के बाद भी लगता है जैसे शरीर फिर से हिल रहा हो। किसी-किसी को सिर चकराता है। मतली भी महसूस होती है। इसे पोस्ट अर्थक्वेक डिजिनेस सिंड्रोम (PEDS) कहा जाता है।
पोस्ट अर्थक्वेक डिजिनेस सिंड्रोम क्या है?
पीईडीएस एक न्यूरोलॉजिकल स्थिति है। भूकंप आने पर या कुछ समय तक कंपन में रहने पर, कान के पीछे मौजूद नसों पर असर पड़ता है। जनरल फिजिशियन रुद्रजीत पाल कहते हैं, "भूकंप के दौरान वेस्टिबुलर सिस्टम पर दबाव पड़ता है। उसी के कारण कंपन रुक जाने के बाद डिजिनेस या सिर चकराना, मतली जैसे लक्षण दिखाई देते हैं।"
सांकेतिक तस्वीर Istock क्या पीईडीएस डरने की बात है?
पोस्ट अर्थक्वेक डिजिनेस सिंड्रोम बहुत सामान्य बात है। अचानक कंपन की वजह से यह स्थिति बनती है इसलिए भूकंप रुक जाने के बाद भी शरीर डोलता हुआ महसूस होता है। डॉ पाल ने बताया कि इस स्थिति में डरने की कोई बात नहीं है।
पीईडीएस होने पर क्या करें?
पोस्ट अर्थक्वेक डिजिनेस सिंड्रोम में आमतौर पर सिर चकराना, मतली या शरीर डोलने जैसे लक्षण दिखते हैं। भूकंप के बाद 10 से 15 मिनट शांति से बैठने या लेटने पर ये लक्षण कम हो जाते हैं। डॉ पाल का कहना है कि जिन लोगों को कान की नसों की समस्या होती है या जिन्हें वर्टिगो है, उनके मामले में पीईडीएस के लक्षण ज्यादा तीव्र हो सकते हैं। ऐसे में दवा की मदद ली जा सकती है। यदि ऐसी स्थिति का सामना करें तो एक जगह बैठ जाएं या लेट जाएं। जरूरत पड़े तो डॉक्टर से संपर्क कर सकते हैं।