नई दिल्ली : उद्योगपति अनिल अंबानी शुक्रवार को प्रवर्तन निदेशालय (ED) के समन के बावजूद पूछताछ के लिए उपस्थित नहीं हुए। उन्हें मनी लॉन्ड्रिंग मामले में पूछताछ के लिए बुलाया गया था। इससे एक दिन पहले वह दिल्ली स्थित ED मुख्यालय में जांच में शामिल हुए थे और सुबह लगभग 11 बजे अपना बयान दर्ज कराया था।
यह कार्रवाई रिलायंस कम्युनिकेशंस लिमिटेड से जुड़े कथित बैंक धोखाधड़ी मामले की जांच के तहत की जा रही है। ED ने मुंबई के पाली हिल स्थित उनकी आवासीय संपत्ति ‘Abode’ को लगभग 3,716.83 करोड़ रुपये मूल्य के साथ मनी लॉन्ड्रिंग निवारण अधिनियम, 2002 (PMLA) के तहत अस्थायी रूप से कुर्क (अटैच) किया है। इससे पहले इसी संपत्ति का एक हिस्सा 473.17 करोड़ रुपये तक कुर्क किया गया था। ताजा कार्रवाई के बाद समूह से जुड़ी कुल कुर्क संपत्तियों का मूल्य 15,700 करोड़ रुपये से अधिक हो गया है।
ED ने यह जांच केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो द्वारा दर्ज एफआईआर के आधार पर शुरू की थी। एफआईआर भारतीय दंड संहिता की धाराओं 120-बी, 406 और 420 तथा भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1989 की धाराओं 13(2) और 13(1)(d) के तहत दर्ज की गई थी। इसमें RCOM, अनिल अंबानी और अन्य को नामजद किया गया है।
जांच एजेंसी के अनुसार RCOM और उसकी समूह कंपनियों ने देशी और विदेशी बैंकों से ऋण लिया था, जिनकी कुल बकाया राशि लगभग 40,185 करोड़ रुपये है। पिछले वर्ष 5 अगस्त को भी ED ने उनसे ऋण लेन-देन से जुड़े विभिन्न बिंदुओं पर पूछताछ की थी। उस समय उन्होंने आवश्यक दस्तावेज प्रस्तुत करने के लिए सात दिन का समय मांगा था।
ED लगभग 14 हजार करोड़ रुपये से अधिक के ऋण धोखाधड़ी मामले की जांच कर रही है। संसद में वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने बताया था कि स्टेट बैंक ऑफ इंडिया ने RBI के दिशा-निर्देशों के अनुसार रिलायंस कम्युनिकेशंस और उसके प्रवर्तक अनिल अंबानी को धोखाधड़ी श्रेणी में वर्गीकृत किया है और इस संबंध में CBI में शिकायत दर्ज कराने की तैयारी की जा रही है।
रिलायंस कम्युनिकेशंस पर केनरा बैंक को 1,050 करोड़ रुपये से अधिक की कथित धोखाधड़ी का भी आरोप है। जांच में विदेशों में अघोषित बैंक खातों और संपत्तियों की भी पड़ताल की जा रही है।
ED ने पहले यह भी कहा था कि रिलायंस म्यूचुअल फंड ने YES बैंक के AT-1 बॉन्ड में 2 हजार 850 करोड़ रुपये का निवेश किया था, जिसे संदिग्ध लेन-देन माना जा रहा है। इसके अलावा SEBI से प्राप्त जानकारी के आधार पर ED ने आरोप लगाया कि रिलायंस इंफ्रा ने एक संबंधित कंपनी के माध्यम से बड़ी धनराशि समूह कंपनियों को स्थानांतरित की, जिसे नियमानुसार संबंधित पक्ष के रूप में घोषित नहीं किया गया था।
जांच में यह भी सामने आया कि समूह की कंपनियों द्वारा लिए गए ऋण का उपयोग अन्य कंपनियों के कर्ज चुकाने, संबंधित पक्षों को धन हस्तांतरित करने और निवेश के लिए किया गया। एजेंसी के अनुसार हजारों करोड़ रुपये का धन कथित रूप से इधर-उधर किया गया।
पिछले वर्ष ED ने नवी मुंबई स्थित धीरूभाई अंबानी नॉलेज सिटी (DAKC) में 132 एकड़ से अधिक भूमि को भी कुर्क किया था, जिसकी कीमत 4,462.81 करोड़ रुपये बताई गई थी।
प्रवर्तन निदेशालय ने कहा है कि वह वित्तीय अपराधों के मामलों में जांच जारी रखेगा और अवैध रूप से अर्जित संपत्तियों को जब्त कर वैध दावेदारों को लौटाने की प्रक्रिया सुनिश्चित करेगा।