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कर वृद्धि के बाद सिगरेट बाजार में अव्यवस्था, खरीदार परेशान

एक ही ब्रांड की सिगरेट एक ही इलाके में अलग-अलग कीमत पर बेची जा रही है। इस पूरे घटनाक्रम में उपभोक्ता, दुकानदार से लेकर आपूर्ति व्यवस्था तक सभी परेशान हो गए हैं।

By अंशुमान गोस्वामी, Posted by : राखी मल्लिक

Feb 26, 2026 11:33 IST

नई दिल्ली : फरवरी 2026 से सिगरेट पर कर वृद्धि लागू होने के बाद भारत के बाजार में सिगरेट बिक्री को लेकर एक तरह की अव्यवस्था शुरू हो गई है। एक ही ब्रांड की सिगरेट एक ही इलाके में अलग-अलग कीमत पर बेची जा रही है। खुदरा विक्रेता होलसेलरों को दोष दे रहे हैं। वहीं थोक विक्रेता नई कर संरचना को जिम्मेदार ठहरा रहे हैं। इस पूरे घटनाक्रम में उपभोक्ता, दुकानदार से लेकर आपूर्ति व्यवस्था तक सभी परेशान हैं।

सरकार ने दिसंबर 2025 में नई कर संरचना की घोषणा की। प्रति 1,000 स्टिक सिगरेट पर 2,050 रुपये से 8,500 रुपये तक अतिरिक्त उत्पाद शुल्क लगाया गया। इसके साथ पहले का 40 प्रतिशत GST भी बरकरार है। इसके परिणामस्वरूप सिगरेट के खुदरा मूल्य में कर का हिस्सा लगभग 66 प्रतिशत तक पहुंच गया है।

इस कर वृद्धि के कारण बाजार में आपूर्ति की समस्या देखने को मिली। कई दुकानों में सिगरेट का स्टॉक कम हो गया है। थोक विक्रेताओं के खिलाफ स्टॉक जमा कर रखने के आरोप भी लगे हैं। कई दुकानदारों का कहना है कि उन्हें पहले की दर पर माल नहीं मिल रहा है। इसलिए वे अधिक कीमत पर बेचने को मजबूर हैं।

कई मामलों में MRP से 20 प्रतिशत या उससे अधिक कीमत पर भी सिगरेट बेची गई है। दिल्ली, अहमदाबाद और अन्य शहरों में भी यही स्थिति है। खुदरा दुकानदारों का एक वर्ग बता रहा है कि कर वृद्धि के बाद सिगरेट की बिक्री काफी हद तक कम हुई है। कई विक्रेताओं का आरोप है कि थोक कारोबारियों ने आपूर्ति बंद कर दी थी या सीमित मात्रा में दे रहे थे। इससे बाजार में कृत्रिम संकट पैदा हो गया। खुदरा विक्रेताओं का कहना है कि कर वृद्धि से उनकी आय नहीं बढ़ी, बल्कि ऊपरी स्तर के व्यापारियों का मुनाफा बढ़ा है।

इस स्थिति से ग्राहक भी नाराज हैं। कई लोगों का आरोप है कि एक ही दुकान में एक ही दिन अलग-अलग कीमत पर सिगरेट बेची गई। एक उपभोक्ता ने कहा कि सरकार कर बढ़ा सकती है, लेकिन MRP से अधिक कीमत पर बेचना गैरकानूनी और अनुचित है। दूसरे ने कहा कि नए कर के लागू होने से पहले ही कीमतें बढ़नी शुरू हो गई थीं।

विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार भारत में लगभग 26.7 करोड़ लोग तंबाकू का सेवन करते हैं। इनमें से लगभग 13 करोड़ लोग धूम्रपान करते हैं। दुनिया के कुल धूम्रपान करने वालों में से लगभग 12 प्रतिशत भारत में रहते हैं। एक सर्वेक्षण में पाया गया है कि कोलकाता में धूम्रपान की दर सबसे अधिक है। यहां लगभग 56.6 प्रतिशत लोगों को धूम्रपायी के रूप में चिह्नित किया गया है।

विशेषज्ञों का मानना है कि कर वृद्धि का मुख्य उद्देश्य जनस्वास्थ्य की रक्षा करना है। सरकार लंबे समय से तंबाकू के उपयोग को कम करने के लिए कर वृद्धि की नीति अपनाती रही है। इसका लक्ष्य धूम्रपान को हतोत्साहित करना और जनस्वास्थ्य की रक्षा करना है। हालांकि व्यवहार में इसके कारण बाजार में अव्यवस्था, मूल्यवृद्धि और आपूर्ति संबंधी समस्याओं जैसी नई चुनौतियां सामने आई हैं। इससे यह स्पष्ट हुआ है कि केवल कर बढ़ाना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि उसका सही क्रियान्वयन और निगरानी भी उतनी ही महत्वपूर्ण है।

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