कोलकाताः हाल के दिनों में विमान को बम से उड़ाने की धमकी दिये जाने की घटनाओं में तेजी से इजाफा हुआ है। ‘फ्लाइट में बम’ जैसे संदेशों ने सुरक्षा एजेंसियों की चिंता बढ़ा दी है। ताजा घटनाक्रम में 14 फरवरी यानी वैलेंटाइन्स डे (Valentine's Day) के दिन इंडिगो (IndiGo) की दो अलग-अलग फ्लाइट के बाथरुम में बम होने की धमकी लिखी मिली। एक फ्लाइट कोलकाता से शिलांग जा रही थी, जबकि दूसरी डिब्रूगढ़ से कोलकाता आ रही थी। दोनों विमानों में तकरीबन 130 यात्री सवार थे। घटना के बाद सभी यात्रियों को नोटिस जारी कर पूछताछ के लिए कोलकाता एयरपोर्ट पुलिस स्टेशन (Kolkata Airport Police Station) बुलाया गया है।
जांच एजेंसियां इन घटनाओं को एक अलग नजरिये से भी देख रही हैं। अधिकारियों का कहना है कि पूर्व में विमान या हवाईअड्डों पर बम रखे जाने की जितनी भी सूचनाएं मिली हैं, उनमें से लगभग सभी झूठी साबित हुई हैं। इसके बावजूद किसी भी सूचना को हल्के में लेना संभव नहीं है। हर बार विमान को रोककर गहन तलाशी लेनी पड़ती है, जिससे उड़ानों में कई घंटे की देरी होती है और एयरलाइंस को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता है।
जांचकर्ताओं के मुताबिक, पूछताछ में अक्सर यह सामने आया है कि ऐसी झूठी धमकियों के पीछे मानसिक असंतुलन, मजाक, कारोबारी दुश्मनी या व्यक्तिगत रंजिश जैसे कारण होते हैं। इनमें ‘असंतोष’ एक बड़ा कारण बनकर उभरा है। कुछ समय पहले जेट एयरवेज (Jet Airways) की एक उड़ान में बाथरुम के भीतर टिश्यू पेपर पर ‘विमान में बम है’ लिखे जाने का मामला सामने आया था। जांच में पता चला कि मुंबई (Mumbai) के एक व्यवसायी ने यह हरकत की थी। बताया गया कि उसने जेट एयरवेज की एक एयरहोस्टेस को प्रेम प्रस्ताव दिया था, जो ठुकरा दिया गया। इसी नाराजगी में उसने फ्लाइट के टॉयलेट में धमकी लिख दी। बाद में आरोपी पकड़ा गया और उसने अपनी गलती मान ली और अफसोस जताया।
इसी पृष्ठभूमि में 14 फरवरी की दोहरी घटना को भी देखा जा रहा है। कोलकाता-शिलांग उड़ान के शौचालय में अंग्रेजी में लिखी एक पर्ची मिली, जिसमें बम होने की बात कही गई थी। पुलिस अब यात्रियों की हैंडराइटिंग के नमूने लेकर उस पर्ची से मिलाएगी। दूसरी ओर, डिब्रूगढ़-कोलकाता उड़ान के शौचालय के आईने पर लिपस्टिक से ‘फ्लाइट में बम’ लिखा गया था। चूंकि यह संदेश उड़ान के दौरान मिला, इसलिए सुरक्षा और क्लीनिंग स्टाफ को प्राथमिक तौर पर संदेह से बाहर रखा जा रहा है। हालांकि महिला यात्रियों और एयरहोस्टेस से भी पूछताछ की जा सकती है, क्योंकि संदेश लिपस्टिक से लिखा गया था।
जांच में एक बड़ी तकनीकी चुनौती भी सामने आती है। विमान के केबिन में आमतौर पर एक कैमरा कॉकपिट के बाहर लगा होता है, जिसका उद्देश्य पायलट को दरवाजे पर खड़े व्यक्ति की पहचान कराना है। इसमें रिकॉर्डिंग की सुविधा नहीं होती। ऐसे में यह पता लगाना कठिन हो जाता है कि शौचालय में कौन और कब गया।
एयरलाइन अधिकारियों के अनुसार, फ्लाइट के शौचालय तक चार वर्गों की पहुंच होती है-लैंडिंग के बाद सुरक्षा अधिकारी, फिर क्लीनिंग स्टाफ, उसके बाद एयरहोस्टेस और अंत में यात्री। कोलकाता-शिलांग उड़ान में संदेश उस समय मिला जब विमान जमीन पर खड़ा था, इसलिए सभी वर्गों की भूमिका की जांच की जा रही है।
इस तरह की घटनाओं का असर केवल यात्रियों की सुरक्षा तक सीमित नहीं रहता। एक बार बम की सूचना मिलने पर विमान को खाली कर पूरी जांच करनी पड़ती है। इसमें कम से कम चार घंटे की देरी हो जाती है और अन्य उड़ानों का शेड्यूल भी प्रभावित होता है। 18 जनवरी को भी इंडिगो (IndiGo) की दिल्ली से बागडोगरा जा रही एक उड़ान में बम की सूचना मिलने पर विमान को लखनऊ डायवर्ट करना पड़ा था।
सुरक्षा अधिकारियों का कहना है कि इससे पहले भी ऐसे मामले भी सामने आए हैं, जहां संगठन से नाराज कर्मचारियों ने ही इस तरह की हरकत की हो। ऐसे में जांच एजेंसियां हर पहलू को ध्यान में रखकर पड़ताल कर रही हैं।
फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या व्यक्तिगत आक्रोश, प्रेम में असफलता या क्षणिक गुस्सा विमानन सुरक्षा के लिए नई चुनौती बनता जा रहा है। जब तक जांच पूरी नहीं होती, 130 यात्रियों और संबंधित कर्मचारियों से पूछताछ जारी रहेगी। जांचकर्ता हर एंगल से सच्चाई तलाशने की कोशिश में लगे हैं।