चूरू, राजस्थानः पिछले साल जुलाई में अचानक उपराष्ट्रपति पद से इस्तीफा देने वाले जगदीप धनखड़ (Jagdeep Dhankhar) ने गुरुवार को इस विषय पर अपनी चुप्पी तोड़ी। चूरू में आयोजित जनसभा में उन्होंने स्पष्ट किया कि उनका इस्तीफा स्वास्थ्य संबंधी कारणों से नहीं था, बल्कि उन्होंने केवल अपने स्वास्थ्य को प्राथमिकता देने की बात लिखी थी।
धनखड़ ने सभा में कहा, “कहावत है, स्वास्थ्य ही धन है। मैंने हमेशा अपने शरीर का ख्याल रखा है, कभी लापरवाही नहीं की। इस्तीफे में कहीं यह नहीं लिखा कि मैं अस्वस्थ हूं। केवल इतना लिखा कि स्वास्थ्य को प्राथमिकता देना चाहिए। यह हर किसी के लिए जरूरी है।”
उन्होंने अपने स्वास्थ्य को लेकर उठाए जा रहे सवालों का खंडन करते हुए कहा कि वे पूरी तरह स्वस्थ हैं और उनका इस्तीफा किसी बीमारी या अस्वस्थता के कारण नहीं था।
अचानक इस्तीफा देने से मची थी हलचल
धनखड़ ने उपराष्ट्रपति बनने के बाद पहले कहा था कि 2027 तक जिम्मेदारी निभाएंगे। लेकिन 21 जुलाई 2025 को अचानक राष्ट्रपति (Draupadi Murmu) को अपना इस्तीफा भेज दिया। इस कदम ने पूरे देश में सियासी अटकलें तेज कर दीं।
विशेष रूप से राज्यसभा में जस्टिस यशवंत वर्मा के महाभियोग प्रस्ताव को बिना केंद्र सरकार से परामर्श किए स्वीकार करने के बाद, केंद्र की NDA सरकार धनखड़ से नाराज हुई थी। राजनीतिक चर्चा थी कि यदि धानखड़ इस्तीफा न देते, तो उन्हें हटाने के लिए NDA की ओर से प्रस्ताव लाया जा सकता था।
राजनीतिक गलियारों में उनका इस्तीफा कई कारणों से जोड़ा गया। किसानों के हित में कदम उठाना, केंद्र सरकार की कुछ नीतियों पर विरोध, और विपक्ष के सवालों को न्यायसंगत तरीके से उठाना।
धनखड़ के इस्तीफे पर विपक्ष का रुख
लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी (Rahul Gandhi) ने कहा था कि “बड़ा कारण है, कई लोग जानते हैं।” उन्होंने धनखड़ पर सवाल उठाते हुए कहा कि राजसभा में इतने सक्रिय रहने के बाद अब अचानक चुप क्यों हैं।
विरोधी दलों ने दावा किया कि मोदी सरकार की कई नीतियों और किसानों के हित में कदम उठाने के कारण धनखड़ पर दबाव था। इस इस्तीफे ने राजनीतिक गलियारों में लंबी बहस और अटकलों का माहौल बना दिया था।
धनखड़ ने चुप्पी तोड़ी
धनखड़ ने स्वास्थ्य संबंधी अटकलों को खारिज किया है, लेकिन अभी तक स्पष्ट नहीं किया कि उन्होंने पद क्यों छोड़ा। उनके बयान के बाद राजनीतिक शोरगुल कुछ कम हुआ, लेकिन राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि उनके इस्तीफे के पीछे कई राजनीतिक कारक काम कर रहे थे।
इससे पहले, उपराष्ट्रपति बनने के बाद उन्होंने सार्वजनिक रूप से कहा था कि वे 2027 तक पद संभालेंगे। अचानक इस्तीफा भेजने के कदम ने न सिर्फ राजनीतिक पार्टियों के बीच चर्चा बढ़ाई, बल्कि विपक्ष ने भी इस पर सवाल उठाए।