नयी दिल्लीः सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को SIR केस 2025 में राज्य सरकार के वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल के दावों को खारिज कर दिया। कोर्ट ने साफ कहा कि “छोटा-मोटा बहाना नहीं चलेगा। ज्यूडिशियल ऑफिसर्स को स्वतंत्र रूप से अपना काम करने दें।”
पिछले हफ्ते की सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार और इलेक्शन कमीशन ऑफ इंडिया (ECI) के बीच तालमेल की कमी पर नाराजगी जताई थी। राज्य ने ECI द्वारा तैयार किए गए ट्रेनिंग मॉड्यूल और दिशा-निर्देशों का विरोध किया था, जिसके चलते सुप्रीम कोर्ट को मामले में हस्तक्षेप करना पड़ा।
राज्य का दावा और कोर्ट का जवाब
कपिल सिब्बल ने शुक्रवार को कोर्ट को बताया कि ECI ने सुप्रीम कोर्ट के आदेशों को अनदेखा करते हुए नए गाइडलाइंस जारी किए हैं। सिब्बल ने आरोप लगाया कि सब-डिस्ट्रिक्ट मजिस्ट्रेट (SDO) द्वारा जारी डोमिसाइल सर्टिफिकेट को SIR प्रोजेक्ट में डॉक्यूमेंट के रूप में स्वीकार नहीं किया जा रहा है।
इस पर चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने कड़ा रुख अपनाया और कहा: “प्लीज प्रोसेस को रोकने के लिए छोटे-मोटे बहाने न बनाएं। इसे पूरा करना होगा। ज्यूडिशियल ऑफिसर्स को स्वतंत्र रूप से काम करने दें। वे अपने काम में स्वतंत्र हैं।”
सिब्बल ने दावा किया कि आयोग ज्यूडिशियल ऑफिसर्स को यह निर्देश नहीं दे सकता कि कौन सा सर्टिफिकेट स्वीकार होगा और कौन नहीं।
जस्टिस जयमाल्य बागची ने इस पर कहा: “हमारा ऑर्डर दिन की तरह साफ है। ECI का नोटिफिकेशन हमारे आदेश को ओवरराइड नहीं कर सकता। अगर SDO का रेजिडेंस सर्टिफिकेट स्वीकार नहीं किया गया है, तो इसकी जांच की जाएगी।”
कोर्ट ने राज्य और चुनाव आयोग को दिया निर्देश
सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि ज्यूडिशियल ऑफिसर्स को बिना किसी रोक-टोक अपना काम करना होगा। अदालत ने यह भी निर्देश दिया कि राज्य सरकार और ECI को प्रक्रिया में हस्तक्षेप नहीं करना चाहिए।
पिछले हफ्ते, कोर्ट ने राज्य सरकार और आयोग के बीच तालमेल की कमी पर नाराजगी जताई थी। इसके बाद कलकत्ता हाई कोर्ट के आदेश के अनुसार जजों द्वारा डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन का बचा हुआ काम पूरा करने का निर्देश दिया गया था। मंगलवार तक लगभग 270 ज्यूडिशियल ऑफिसर्स SIR प्रोजेक्ट पर काम कर रहे हैं।
ट्रेनिंग मॉड्यूल और विवाद
सिब्बल ने कोर्ट को बताया कि ज्यूडिशियल अधिकारियों को ECI की ट्रेनिंग मॉड्यूल के अनुसार निर्देश दिया गया है कि किस तरह के डॉक्यूमेंट को मान्य किया जाए। उनका दावा था कि सुप्रीम कोर्ट ने तय किया था कि हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस ही प्रोसीजर तय करेंगे। कोर्ट ने साफ कर दिया कि ECI या कोई अन्य संस्थान सुप्रीम कोर्ट के आदेश के ऊपर नहीं जा सकता। जस्टिस बागची ने कहा: “हमारा ऑर्डर स्पष्ट है। किसी भी ट्रेनिंग मॉड्यूल से सुप्रीम कोर्ट के आदेश को प्रभावित नहीं किया जा सकता।”
कानूनी जानकारों का कहना है कि सुप्रीम कोर्ट का यह रुख स्पष्ट रूप से बताता है कि ECI या राज्य सरकार किसी भी तरह से ज्यूडिशियल ऑफिसर्स के काम में बाधा नहीं डाल सकते। अदालत ने यह सुनिश्चित किया कि ज्यूडिशियल ऑफिसर्स स्वतंत्र रूप से काम करें और किसी भी बाहरी दबाव में न आएं। विशेषज्ञों के अनुसार, सुप्रीम कोर्ट का यह आदेश SIR केस की पारदर्शिता और निष्पक्षता को बनाए रखने के लिए महत्वपूर्ण है।
राज्य और चुनाव आयोग तालमेल रखे
कोर्ट ने यह भी कहा कि SDO के रेजिडेंस सर्टिफिकेट के मामले की जांच होगी। आगामी सुनवाई में यह स्पष्ट किया जाएगा कि क्या ECI ने अपने नोटिफिकेशन में सुप्रीम कोर्ट के आदेशों का उल्लंघन किया है।
इस फैसले के बाद राज्य सरकार और ECI के बीच तालमेल सुधारने की संभावना बढ़ गई है और ज्यूडिशियल ऑफिसर्स बिना किसी रोक-टोक के अपना कार्य पूरा कर सकेंगे।